केंद्र सरकार ने किसानों और देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से बुधवार को कई बड़े फैसले किए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक में खरीफ विपणन सत्र 2026-27 के लिए धान समेत 14 प्रमुख फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में बढ़ोतरी को मंजूरी दी गई।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बैठक के बाद जानकारी देते हुए बताया कि सरकार ने किसानों को उनकी लागत पर कम से कम 50 प्रतिशत लाभ सुनिश्चित करने की नीति को जारी रखा है।
धान का MSP बढ़ाकर 2,441 रुपये प्रति क्विंटल
सरकार ने धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य में 72 रुपये की बढ़ोतरी की है। अब किसानों को धान के लिए 2,441 रुपये प्रति क्विंटल MSP मिलेगा।
सरकार का कहना है कि यह फैसला किसानों की आय बढ़ाने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने के उद्देश्य से लिया गया है।
14 खरीफ फसलों के बढ़े दाम
कैबिनेट ने खरीफ सीजन की 14 प्रमुख फसलों के MSP में इजाफा किया है। इनमें सबसे ज्यादा बढ़ोतरी सूरजमुखी के बीज पर की गई है।
MSP में प्रमुख बढ़ोतरी
- सूरजमुखी बीज – 622 रुपये प्रति क्विंटल
- कपास – 557 रुपये प्रति क्विंटल
- नाइजरसीड – 515 रुपये प्रति क्विंटल
- तिल – 500 रुपये प्रति क्विंटल
सरकार के अनुसार, इन फैसलों से किसानों को करीब 2.6 लाख करोड़ रुपये का भुगतान होने का अनुमान है।
इन फसलों में किसानों को सबसे ज्यादा फायदा
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि कुछ फसलों में किसानों को लागत के मुकाबले काफी अधिक लाभ मिलने की उम्मीद है।
- मूंग – 61% अनुमानित लाभ
- बाजरा – 56%
- मक्का – 56%
- अरहर/तूर – 54%
सरकार का दावा है कि MSP तय करते समय उत्पादन लागत और किसानों की आय दोनों को ध्यान में रखा गया है।
कोयले से गैस बनाने की तैयारी
कैबिनेट बैठक में ऊर्जा क्षेत्र को लेकर भी बड़ा फैसला लिया गया। सरकार अब कोयले को सीधे जलाने के बजाय उसे गैस में बदलने की तकनीक को बढ़ावा देगी।
कोयला गैसीकरण योजना (Coal Gasification Scheme) के तहत तैयार होने वाली गैस का इस्तेमाल तीन प्रमुख क्षेत्रों में किया जाएगा—
- खाद निर्माण
- बिजली उत्पादन
- औद्योगिक केमिकल बनाने में
सरकार का कहना है कि इससे विदेशों से गैस और केमिकल आयात पर निर्भरता कम होगी और देश ऊर्जा के क्षेत्र में अधिक आत्मनिर्भर बन सकेगा।
‘200 साल तक जरूरतें पूरी कर सकता है भारत का कोयला’
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत के पास इतना कोयला भंडार है कि वह अगले 200 वर्षों तक देश की जरूरतों को पूरा कर सकता है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक के जरिए कोयले का बेहतर और पर्यावरण के अनुकूल उपयोग किया जाएगा।
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सरकार का मानना है कि खेती और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े ये फैसले आने वाले वर्षों में ग्रामीण अर्थव्यवस्था और औद्योगिक विकास दोनों को मजबूती देंगे।









