भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ने अपनी ताजा बैठक में रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखने का फैसला किया है। यह निर्णय समिति के सभी सदस्यों की सहमति से लिया गया। केंद्रीय बैंक ने साथ ही चालू वित्त वर्ष के लिए देश की आर्थिक वृद्धि दर (GDP Growth Rate) के अनुमान को पहले के मुकाबले थोड़ा कम कर दिया है।
RBI का यह फैसला ऐसे समय आया है जब वैश्विक स्तर पर कई आर्थिक और भू-राजनीतिक चुनौतियां सामने हैं। केंद्रीय बैंक ने महंगाई को नियंत्रण में रखते हुए विकास दर को संतुलित बनाए रखने की रणनीति अपनाई है।
GDP ग्रोथ अनुमान में क्यों की गई कटौती?
रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए वास्तविक GDP वृद्धि दर का अनुमान घटाया है। इसके पीछे कई प्रमुख कारण बताए गए हैं:
1. वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच जारी टकराव से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chain) प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है। इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार और निवेश पर असर पड़ सकता है।
2. ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी
कच्चे तेल समेत कई महत्वपूर्ण कमोडिटी की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है। ऊर्जा लागत बढ़ने से उद्योगों का खर्च बढ़ सकता है, जिसका असर आर्थिक गतिविधियों पर पड़ता है।
3. मानसून और कृषि क्षेत्र से जुड़ी चिंताएं
भारत की अर्थव्यवस्था में कृषि क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका है। मौसम संबंधी अनिश्चितताओं और संभावित कृषि जोखिमों को देखते हुए RBI ने विकास दर के अनुमान को अधिक यथार्थवादी बनाया है।
पिछले डेढ़ साल में RBI ने कितनी बार घटाई रेपो रेट?
जनवरी 2025 से जून 2026 तक RBI कुल 125 बेसिस प्वाइंट की कटौती कर चुका है। इस दौरान रेपो रेट को 6.50 प्रतिशत से घटाकर 5.25 प्रतिशत तक लाया गया। लगातार ब्याज दरों में कमी का उद्देश्य आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना और ऋण को सस्ता बनाना रहा है।
इसी वजह से बैंकिंग सिस्टम में लोन की लागत कम हुई और उपभोक्ताओं को राहत मिली।
होम लोन और EMI पर क्या पड़ेगा असर?
रेपो रेट स्थिर रहने का सबसे बड़ा फायदा फ्लोटिंग रेट लोन धारकों को मिलेगा।
- होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की EMI में फिलहाल कोई बढ़ोतरी नहीं होगी।
- जिन ग्राहकों के लोन ब्याज दरें रेपो रेट से जुड़ी हैं, उन्हें कम ब्याज दरों का लाभ मिलता रहेगा।
- नया लोन लेने वाले ग्राहकों के लिए भी उधार लेना अपेक्षाकृत सस्ता बना रहेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि स्थिर ब्याज दरें रियल एस्टेट और ऑटोमोबाइल सेक्टर की मांग को मजबूत बनाए रखने में मदद कर सकती हैं।
FD निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
पिछले वर्ष रेपो रेट में लगातार कटौती के कारण कई बैंकों ने फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर ब्याज दरें कम की थीं। हालांकि इस बार रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं होने से FD निवेशकों को तत्काल राहत मिली है।
- वरिष्ठ नागरिकों को मौजूदा ऊंची FD दरों का लाभ मिलता रह सकता है।
- बैंक निकट भविष्य में FD रेट्स में बड़े बदलाव से बच सकते हैं।
- सुरक्षित निवेश पसंद करने वाले निवेशकों के लिए यह सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
अर्थव्यवस्था को कैसे मिलेगा फायदा?
रेपो रेट को स्थिर रखने का फैसला आर्थिक संतुलन बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
- उपभोक्ता खर्च में स्थिरता बनी रहेगी।
- आवास और वाहन क्षेत्र में मांग को समर्थन मिलेगा।
- उद्योगों के लिए ऋण लागत नियंत्रित रहेगी।
- निवेश और रोजगार सृजन को प्रोत्साहन मिल सकता है।
इसके अलावा RBI को वैश्विक तेल कीमतों और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर नजर रखने का समय भी मिलेगा, जिससे भविष्य की नीतिगत रणनीति अधिक प्रभावी बनाई जा सकेगी।
यह भी पढ़ें: बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने के. अन्नामलाई का इस्तीफा स्वीकारा
RBI द्वारा रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखने का निर्णय बाजार और आम उपभोक्ताओं दोनों के लिए राहत भरा माना जा रहा है। हालांकि GDP ग्रोथ अनुमान में कटौती यह संकेत देती है कि केंद्रीय बैंक वैश्विक और घरेलू चुनौतियों को लेकर सतर्क है। आने वाले महीनों में महंगाई, तेल कीमतों और मानसून की स्थिति RBI की अगली नीतिगत दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।









