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FCRA Bill 2026: अमेरिकी सांसद की टिप्पणी पर भारत का पलटवार, MEA बोला- विदेशी फंडिंग को रेगुलेट करना हमारा आंतरिक मामला

FCRA Bill 2026: विदेशी फंडिंग को नियंत्रित करने वाले FCRA संशोधन विधेयक 2026 को लेकर भारत और अमेरिका के बीच बयानबाजी सामने आई है।

Gautam Rishi by Gautam Rishi
7 August 2026
in भारत
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FCRA Bill 2026: विदेशी फंडिंग को नियंत्रित करने वाले FCRA संशोधन विधेयक 2026 को लेकर भारत और अमेरिका के बीच बयानबाजी सामने आई है। अमेरिकी सांसद राइली मूर की ओर से प्रस्तावित कानून पर आपत्ति जताए जाने के बाद भारत के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि देश से जुड़े विधायी फैसले भारत का आंतरिक विषय हैं। विदेश मंत्रालय ने साथ ही कहा कि अमेरिका समेत कई देश विदेशी धन के प्रवाह पर नियम लागू करते हैं।

FCRA Amendment Bill पर भारत ने क्या कहा?

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने FCRA संशोधन को लेकर अमेरिकी सांसद की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत से संबंधित विधायी मामलों पर फैसला देश की संसद करती है।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि विदेशी फंडिंग को नियंत्रित करने वाले नियम केवल भारत में ही नहीं हैं। अमेरिका समेत कई देशों में विदेश से आने वाले धन की निगरानी और नियमन के लिए कानूनी व्यवस्था मौजूद है।

भारत का संदेश साफ है कि विदेशी चंदे से संबंधित नियम बनाना और उनमें बदलाव करना देश की संप्रभु विधायी प्रक्रिया का हिस्सा है।

Bi-Weekly Media Briefing by the Official Spokesperson (August 07, 2026)
https://t.co/rT0CbgPosI

— Randhir Jaiswal (@MEAIndia) August 7, 2026

अमेरिकी सांसद राइली मूर ने FCRA बिल पर क्या कहा?

अमेरिकी सांसद राइली मूर ने FCRA संशोधन विधेयक 2026 को लेकर सार्वजनिक रूप से चिंता जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रस्तावित बदलावों का असर भारत के ईसाई समुदाय और धार्मिक संस्थाओं पर पड़ सकता है।

मूर ने सोशल मीडिया पोस्ट में भारत में ईसाई समुदाय के लंबे इतिहास का उल्लेख करते हुए दावा किया कि प्रस्तावित बदलावों के जरिए सरकार चर्च और धार्मिक चैरिटी संस्थाओं पर अधिक नियंत्रण हासिल कर सकती है।

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि विधेयक पारित होता है तो यह भारत-अमेरिका संबंधों में चिंता का विषय बन सकता है।

हालांकि, ये अमेरिकी सांसद द्वारा व्यक्त किए गए राजनीतिक आरोप और चिंताएं हैं। भारत सरकार की ओर से विधेयक को लेकर अलग रुख रखा गया है और इसे विदेशी फंडिंग के नियमन से जुड़ा कानूनी कदम बताया जा रहा है।

FCRA बिल को लेकर कैथोलिक संगठनों की भी प्रतिक्रिया

FCRA संशोधन प्रस्ताव पर कैथोलिक एरीना ने भी प्रतिक्रिया दी है। संगठन ने राइली मूर की टिप्पणी का समर्थन करते हुए भारत में ईसाइयों की स्थिति को लेकर चिंता जताई और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस मुद्दे को उठाने की बात कही।

इस तरह प्रस्तावित संशोधन को लेकर भारत के भीतर राजनीतिक चर्चा के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।

FCRA Amendment Bill 2026 में क्या बदल सकता है?

सरकार द्वारा प्रस्तावित FCRA संशोधन विधेयक 2026 में विदेशी फंड की सुरक्षा और उसके नियमन से जुड़े प्रावधानों में बदलाव का प्रस्ताव है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यदि किसी संगठन का FCRA रजिस्ट्रेशन समाप्त हो जाता है या उसे रद्द कर दिया जाता है, तो उस स्थिति में विदेशी फंड की सुरक्षा के लिए एक नामित प्राधिकरण की व्यवस्था प्रस्तावित है।

इसके अलावा, विदेशी चंदे के लिए पंजीकरण को निर्धारित उद्देश्यों और अनुमोदित राज्यों से जोड़ने की व्यवस्था भी बताई गई है।

प्रस्तावित नियमों में अनुमत धार्मिक गतिविधियों के दायरे से धर्म परिवर्तन के उद्देश्य से किए जाने वाले प्रचार-प्रसार को अलग रखने का प्रावधान भी शामिल है।

FCRA क्या है और इसका काम क्या है?

FCRA यानी Foreign Contribution (Regulation) Act विदेशी स्रोतों से मिलने वाले चंदे को नियंत्रित करने वाला भारतीय कानून है। इसका उद्देश्य यह तय करना है कि विदेशी योगदान कौन प्राप्त कर सकता है और उसका इस्तेमाल किन परिस्थितियों में किया जा सकता है।

भारत में विदेशी चंदे से जुड़े नियमों का इतिहास पुराना है। FCRA की शुरुआत 1976 में हुई थी। बाद में विदेशी योगदान के नियमन को नए कानूनी ढांचे के तहत मजबूत किया गया और 2010 में नया FCRA कानून लागू हुआ।

इसके बाद भी कानून में समय-समय पर संशोधन किए गए। अब 2026 में प्रस्तावित बदलावों के जरिए विदेशी फंडिंग व्यवस्था को और अधिक विनियमित करने की कोशिश की जा रही है।

सरकार की नजर विदेशी फंडिंग के नियमन पर

FCRA व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य विदेशी स्रोतों से आने वाले धन के इस्तेमाल में पारदर्शिता और नियमन सुनिश्चित करना है। सरकार का तर्क है कि विदेशी योगदान के इस्तेमाल से जुड़े नियमों का पालन जरूरी है, ताकि फंड का इस्तेमाल निर्धारित उद्देश्यों के अनुरूप हो।

प्रस्तावित संशोधन इसी नियामक ढांचे को आगे बढ़ाने की दिशा में देखा जा रहा है।

भारत-अमेरिका संबंधों पर क्यों महत्वपूर्ण है FCRA विवाद?

FCRA संशोधन को लेकर अमेरिकी सांसद की सार्वजनिक टिप्पणी के बाद मामला केवल घरेलू कानून तक सीमित नहीं रहा। अमेरिकी सांसद ने इसे धार्मिक स्वतंत्रता और भारत-अमेरिका संबंधों से जोड़कर चिंता जताई है।

दूसरी ओर, भारत ने स्पष्ट किया है कि देश की संसद को अपने कानूनों और विदेशी फंडिंग से जुड़े नियम तय करने का अधिकार है। विदेश मंत्रालय ने अमेरिका समेत दूसरे देशों में मौजूद विदेशी फंडिंग संबंधी नियामक व्यवस्थाओं का भी उल्लेख किया है।

यह भी पढ़ें: CM Vijay Sangeetha Divorce: संगीता ने वापस ली तलाक की याचिका, जानें पूरा मामला

ऐसे में मानसून सत्र के दौरान FCRA संशोधन विधेयक पर होने वाली आगे की संसदीय प्रक्रिया पर देश और विदेश दोनों की नजर बनी हुई है।

Tags: FCRA Amendment Bill 2026FCRA BillFCRA NewsFCRA संशोधन विधेयकForeign Funding RulesIndia US RelationsMEA on FCRARiley Moore FCRAरणधीर जायसवाल FCRA
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