लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक पर जारी चर्चा के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सरकार का पक्ष रखते हुए विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी गठबंधन सार्वजनिक रूप से समर्थन की बात करता है, लेकिन व्यवहार में इस विधेयक का विरोध कर रहा है।
“विरोध प्रक्रिया का नहीं, बिल का है”
अमित शाह ने कहा कि चर्चा के दौरान कई विपक्षी नेताओं ने अपनी बात रखते हुए तरह-तरह की शर्तें और आपत्तियां उठाईं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि उनका विरोध केवल कार्यान्वयन के तरीके को लेकर नहीं, बल्कि पूरे विधेयक को लेकर है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस बिल का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को राजनीतिक रूप से सशक्त बनाना है।
परिसीमन और प्रतिनिधित्व पर जोर
गृह मंत्री ने देश में जनसंख्या के आधार पर असमान प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि कई संसदीय क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या बहुत अधिक है, जिससे प्रतिनिधित्व का संतुलन बिगड़ता है। संविधान के तहत परिसीमन (डीलिमिटेशन) का अधिकार सरकार के पास है और इसे लागू करना जरूरी है।
उन्होंने चेतावनी दी कि जो लोग सीटों की संख्या बढ़ाने का विरोध कर रहे हैं, वे अप्रत्यक्ष रूप से अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए आरक्षित सीटों में वृद्धि का भी विरोध कर रहे हैं।
कांग्रेस पर ऐतिहासिक फैसलों को लेकर हमला
अमित शाह ने कहा कि अतीत में इंदिरा गांधी की सरकार ने आपातकाल के दौरान सीटों को फ्रीज करने का निर्णय लिया था, जिसके कारण लंबे समय तक परिसीमन नहीं हो सका। उन्होंने यह भी कहा कि बाद में भी इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में देरी हुई।
उन्होंने यह तर्क भी दिया कि 1970 के दशक की तुलना में आज देश की आबादी कई गुना बढ़ चुकी है, लेकिन सांसदों की संख्या लगभग स्थिर बनी हुई है, जिससे प्रतिनिधित्व का असंतुलन पैदा हुआ है।
विपक्ष के सवालों पर जवाब
चर्चा के दौरान अखिलेश यादव द्वारा उठाए गए जनसंख्या आंकड़ों के सवाल पर अमित शाह ने कहा कि विपक्ष खुद ही स्पष्ट नहीं है कि वह किस पक्ष में खड़ा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि यदि परिसीमन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में सहयोग दिया जाए, तो सभी क्षेत्रों में वोट का मूल्य समान किया जा सकता है।
जनगणना और जातिगत आंकड़ों पर स्थिति स्पष्ट
गृह मंत्री ने जनगणना में देरी के मुद्दे पर कहा कि कोविड-19 महामारी के कारण यह प्रक्रिया प्रभावित हुई। उन्होंने जानकारी दी कि सरकार ने जातिगत जनगणना कराने का निर्णय ले लिया है और आगामी गणना में व्यक्तियों के स्तर पर जाति से संबंधित जानकारी भी शामिल की जाएगी।
यह भी पढ़ें: संसद में राहुल गांधी द्वारा किया गया “16” का जिक्र बना सियासी रहस्य
2029 चुनाव का संकेत
अमित शाह ने कहा कि यदि 2029 के आम चुनाव महिला आरक्षण के प्रावधानों के तहत कराना है, तो अभी से आवश्यक प्रक्रियाएं शुरू करनी होंगी। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि सीटों की संख्या बढ़ने से संसद के कामकाज के दिनों में भी वृद्धि की जाएगी।









