असम की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जिसने राज्य की सियासी हलचल को तेज कर दिया है। नागांव लोकसभा क्षेत्र से सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा देकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की सदस्यता ग्रहण कर ली है। उनकी यह एंट्री असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा और प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष दिलीप सैकिया की उपस्थिति में हुई।
बीजेपी को मिलेगा मजबूती का संकेत
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने इस घटनाक्रम को बीजेपी के लिए सकारात्मक बताया। उन्होंने कहा कि प्रद्युत बोरदोलोई का लंबा राजनीतिक अनुभव पार्टी को नई दिशा देगा। उनके अनुसार, कांग्रेस में लंबे समय तक सक्रिय रहने के बाद बीजेपी में उनका आना संगठन को और मजबूत करेगा।
सीएम सरमा ने यह भी संकेत दिया कि पार्टी उन्हें भविष्य में विधानसभा चुनाव में उतारने पर विचार कर सकती है। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि किसी नेता को अपने सम्मान के साथ समझौता करना पड़े, तो उस पार्टी में बने रहने का कोई औचित्य नहीं रह जाता।
कांग्रेस को झटका, इस्तीफों की बढ़ती लहर
प्रद्युत बोरदोलोई ने एक दिन पहले ही कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता और सभी पदों से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने अपना इस्तीफा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को भेजा। इसके महज 24 घंटे के भीतर उनका बीजेपी में शामिल होना राजनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
और नेताओं के भी बदल सकते हैं पाले
इसी क्रम में कांग्रेस के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष नवज्योति तालुकदार ने भी पार्टी से दूरी बना ली है। उन्होंने संकेत दिए हैं कि वे जल्द ही बीजेपी में शामिल होंगे। उनके अनुसार, राज्य में कई अन्य नेता भी पार्टी बदलने पर विचार कर रहे हैं।
असम में इस तरह के लगातार हो रहे राजनीतिक बदलाव आने वाले चुनावों से पहले समीकरण बदल सकते हैं। बीजेपी जहां अपने संगठन को और मजबूत करने में जुटी है, वहीं कांग्रेस के सामने अपनी पकड़ बनाए रखने की चुनौती और गहरी होती नजर आ रही है।
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राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम सिर्फ एक नेता के पार्टी बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्य की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत भी हो सकता है।









