बिहार की राजनीति में एक बार फिर चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। अब तक भाजपा पर वोट चोरी और बोगस वोटिंग के आरोप लगाती रही राष्ट्रीय जनता दल (राजद) खुद सवालों के घेरे में आ गई है। ढाका विधानसभा सीट से भाजपा के पूर्व विधायक पवन जयसवाल ने राजद पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि फर्जी मतदान के सहारे चुनावी जीत हासिल की गई।
178 वोटों से हार का दावा
पूर्व विधायक पवन जयसवाल ने एक मीडिया बातचीत में कहा कि वे महज 178 वोटों के अंतर से चुनाव हारे हैं। उनका आरोप है कि अगर फर्जी वोटिंग नहीं होती, तो नतीजे पूरी तरह अलग होते। इसी मामले को लेकर उन्होंने पटना हाईकोर्ट का रुख किया है और दस्तावेजों के साथ याचिका दाखिल की है।
1444 फर्जी वोट डालने का आरोप
जयसवाल के मुताबिक, चुनाव के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे लोगों के नाम पर मतदान हुआ, जो या तो जीवित नहीं हैं या फिर क्षेत्र में रहते ही नहीं। उन्होंने बताया कि जांच में 298 ऐसे मतदाता सामने आए जो विदेश में रहते हैं, जबकि 45 मतदाता मृत पाए गए। इसके अलावा 41 ऐसे नाम मिले जिनका नाम दो अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों की मतदाता सूची में दर्ज था।
उन्होंने यह भी दावा किया कि मोतिहारी जेल में बंद एक व्यक्ति के नाम पर भी वोट डाला गया। साथ ही 1057 ऐसे मतदाता पाए गए जो दिल्ली, पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में रहते हैं। जयसवाल के अनुसार, इन सभी को मिलाकर कुल 1444 फर्जी वोट डाले गए।
हाईकोर्ट में याचिका, सबूत होने का दावा
पवन जयसवाल ने कहा कि उन्होंने पटना हाईकोर्ट में याचिका दायर की है और उनके पास सभी आरोपों से जुड़े साक्ष्य मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि उनका विधानसभा क्षेत्र अल्पसंख्यक बहुल है, जहां मतदान के दौरान कई महिलाएं नकाब में वोट डालने पहुंचती हैं। उनका आरोप है कि इसी आड़ में बोगस वोटिंग को अंजाम दिया गया।
विरोध करने पर कार्यकर्ताओं से मारपीट का आरोप
जयसवाल का कहना है कि क्षेत्र के 62 बूथ ऐसे हैं जो अल्पसंख्यक बहुल हैं। इन बूथों पर उनके अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े कार्यकर्ता तैनात थे। आरोप है कि जब उन्होंने फर्जी मतदान का विरोध किया, तो मतदान केंद्रों के बाहर उनके साथ मारपीट की गई।
पीठासीन अधिकारियों पर FIR
पूर्व विधायक ने यह भी बताया कि चुनाव के दिन अलग-अलग बूथों पर पीठासीन अधिकारियों द्वारा कुल छह प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई थीं। उन्होंने मांग की कि चुनाव परिणाम रद्द किए जाएं और मामले की निष्पक्ष जांच हो। जयसवाल ने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर भरोसा है और उम्मीद है कि पटना हाईकोर्ट से उन्हें इंसाफ मिलेगा।
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इस पूरे मामले ने बिहार की चुनावी राजनीति में एक बार फिर पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर बहस छेड़ दी है। अब सभी की निगाहें अदालत के फैसले पर टिकी हैं।









