कलकत्ता हाईकोर्ट ने सोमवार को एक अहम फैसले में पश्चिम बंगाल के 32 हजार प्राइमरी शिक्षकों को बड़ी राहत दी। अदालत की डिवीजन बेंच ने 2023 में जारी उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें इन सभी नियुक्तियों को अवैध ठहराते हुए उन्हें निरस्त करने का निर्देश दिया गया था।
जस्टिस तपोब्रत चक्रवर्ती और जस्टिस रीतब्रतकुमार मित्रा की बेंच ने कहा कि सिंगल बेंच द्वारा दिए गए पूर्व आदेश में कई प्रक्रियात्मक त्रुटियाँ थीं, इसलिए उसे बरकरार नहीं रखा जा सकता। इस फैसले के बाद अब सभी 32 हज़ार प्राइमरी टीचर्स की नियुक्तियां पहले की तरह वैध मानी जाएंगी।
फैसले के तुरंत बाद राज्य सरकार की ओर से संतोष व्यक्त किया गया। राज्य के हायर एजुकेशन मंत्री ब्रात्या बसु ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे “सत्य की जीत” करार दिया। उन्होंने प्राइमरी एजुकेशन बोर्ड और सभी नियुक्त शिक्षकों को बधाई देते हुए कहा कि इस आदेश से हजारों परिवारों को राहत मिली है।
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यह मामला लंबे समय से चर्चा में था और शिक्षक भर्ती प्रक्रिया पर उठाए गए सवालों के चलते हजारों नियुक्तियां कानूनी दांव–पेंच में फंस गई थीं। हाईकोर्ट के इस निर्णय ने अब इन शिक्षकों के भविष्य को लेकर बनी अनिश्चितता को खत्म कर दिया है।









