महाराष्ट्र सरकार में मंत्री आशिष शेलार ने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि पेरिस स्थित UNESCO मुख्यालय में भारत रत्न डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर की प्रतिमा स्थापित की गई है। इसे भारत और महाराष्ट्र के लिए गौरव का क्षण बताते हुए उन्होंने कहा कि अब आंबेडकर के मानवता, समानता और ज्ञान के संदेश को वैश्विक मंच से और व्यापक पहचान मिलेगी।
मंत्री शेलार के अनुसार, यह ऐतिहासिक पहल भारत सरकार के सहयोग और महाराष्ट्र सरकार के सांस्कृतिक कार्य विभाग के प्रयासों से साकार हुई। इस दौरान उन्होंने यूनेस्को मुख्यालय में डॉ. आंबेडकर की प्रतिमा को नमन किया। उन्होंने बताया कि इस अवसर पर भारत के राजदूत विशाल शर्मा भी उपस्थित रहे।
राज्य नेतृत्व की भूमिका का उल्लेख करते हुए शेलार ने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के मार्गदर्शन में यह पहल संभव हो पाई।
जय महाराष्ट्र! जय भीम!
जगभरातील विविध देशांमधून अभ्यासक आणि विद्वान सांस्कृतिक देवाण-घेवाणीसाठी ज्या जागतिक केंद्रस्थानी एकत्र येतात, त्या युनेस्कोच्या मुख्यालयात परमपूज्य भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर यांचा पुतळा स्थापित करण्याचा सन्मान भारताला लाभला.भारत सरकारच्या… pic.twitter.com/vFZmzCgtFh
— Adv. Ashish Shelar – ॲड. आशिष शेलार (@ShelarAshish) February 12, 2026
‘मराठा मिलिट्री लैंडस्केप्स ऑफ इंडिया’ को वर्ल्ड हेरिटेज का दर्जा
मंत्री शेलार ने एक और बड़ी उपलब्धि की जानकारी देते हुए कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज से जुड़े 12 किलों और दुर्गों को ‘Maratha Military Landscapes of India’ शीर्षक के तहत यूनेस्को विश्व धरोहर का दर्जा प्रदान किया गया है।
उन्होंने बताया कि इस संबंध में आधिकारिक प्रमाणपत्र भी प्राप्त हो गया है। इसे महाराष्ट्र के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए उन्होंने कहा कि यह शिवाजी महाराज की अनूठी सैन्य रणनीति और स्वराज की दूरदर्शी सोच को वैश्विक मान्यता मिलने जैसा है।

प्रधानमंत्री का जताया आभार
मंत्री शेलार ने इस उपलब्धि के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन के प्रति आभार व्यक्त किया। साथ ही राज्य नेतृत्व और भारतीय राजनयिक प्रयासों को भी सफलता का श्रेय दिया।
वैश्विक मंच पर महाराष्ट्र की सांस्कृतिक पहचान मजबूत
यूनेस्को मुख्यालय में डॉ. आंबेडकर की प्रतिमा स्थापना और मराठा किलों को विश्व धरोहर सूची में शामिल किए जाने से महाराष्ट्र की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है।
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विशेषज्ञों का मानना है कि इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और राज्य की ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण को नई दिशा मिलेगी। यह उपलब्धि न केवल महाराष्ट्र बल्कि पूरे भारत के लिए गर्व का विषय मानी जा रही है।









