मध्य प्रदेश के धार जिले के धामनोद में आगरा–मुंबई राष्ट्रीय राजमार्ग 52 पर किसानों का धरना धीरे-धीरे उग्र रूप ले रहा है। भारतीय किसान मजदूर महासंघ के नेतृत्व में जारी इस आंदोलन को देखते हुए सोमवार को प्रशासन और किसान नेताओं के बीच आईटीआई कॉलेज में वार्ता आयोजित की गई, लेकिन बैठक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी।
MSP पर अड़ा किसान संगठन, लिखित भरोसे की मांग
राष्ट्रीय भारतीय किसान मजदूर महासंघ के मालवा प्रांत मंत्री रामेश्वर गुर्जर ने बैठक के बाद बताया कि उनकी मुख्य मांग MSP को लेकर है।
गुर्जर ने कहा, “कलेक्टर ने आश्वासन दिया कि मुद्दा शासन तक पहुंचाया जाएगा, लेकिन मौखिक भरोसे पर हम आंदोलन खत्म नहीं कर सकते। हमें लिखित आश्वासन चाहिए।”
कलेक्टर की अपील—चक्का जाम से बढ़ती है परेशानी
धार कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने कहा कि किसानों को समझाया गया है कि सड़क जाम करना समाधान नहीं है, बल्कि इससे आम जनता को अनावश्यक दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
कलेक्टर के अनुसार, “हमने ट्रैफिक डायवर्जन का इंतज़ाम किया है, क्योंकि हाईवे पर हर मिनट कीमती होता है। धामनोद क्षेत्र पहले से ही दुर्घटना संभावित है, इसलिए शांतिपूर्ण तरीके से ज्ञापन सौंपने का आग्रह किया गया है।”
उन्होंने कहा कि राज्य की मांगें केंद्र तक पहुंचाना प्रशासनिक प्रतिनिधि होने के नाते उनका दायित्व है और इस दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
“कानून हाथ में लिया तो कार्रवाई होगी” — प्रशासन का सख्त रुख
स्थिति को लेकर प्रशासन सतर्क है। कलेक्टर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी तरह की कानून–व्यवस्था खराब करने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि अब तक प्रदर्शनकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है और न ही बल प्रयोग का सहारा लिया गया है, बावजूद इसके कि उन्हें उकसाने की कोशिशें हुईं।
आंदोलन के उग्र होने की आशंका
किसानों की लिखित आश्वासन पर जोर और राष्ट्रीय नेतृत्व के आंदोलन में शामिल होने की घोषणा ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में धामनोद हाईवे पर हालात और तनावपूर्ण हो सकते हैं, यदि दोनों पक्ष किसी सहमति पर नहीं पहुंचते।
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धामनोद में किसानों के इस आंदोलन के बीच आम लोगों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है, जबकि प्रशासन समाधान निकालने के लिए बातचीत जारी रखने की बात कर रहा है।









