संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) और कई केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने 12 फरवरी को देशव्यापी भारत बंद का आह्वान किया है। यह बंद केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों, भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते और नए श्रम कानूनों के विरोध में बुलाया गया है। संगठनों का दावा है कि इस आंदोलन में संगठित और असंगठित क्षेत्र के लाखों मजदूर और किसान हिस्सा ले सकते हैं।
किन मुद्दों पर है भारत बंद?
एसकेएम द्वारा जारी बयान के अनुसार, प्रदर्शन कई प्रमुख मांगों को लेकर किया जा रहा है, जिनमें शामिल हैं:
- चार नए श्रम संहिताओं (लेबर कोड) को वापस लेने की मांग
- बिजली विधेयक-2025 और बीज विधेयक-2025 को रद्द करने की मांग
- VB-G RAM G एक्ट-2025 को वापस लेने की मांग
- पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली
- सभी श्रमिकों और योजना कार्यकर्ताओं के लिए न्यूनतम मजदूरी लागू करना
किसान संगठनों का आरोप है कि सरकार की नीतियां कॉरपोरेट हितों को प्राथमिकता दे रही हैं, जिससे किसानों और मजदूरों की आजीविका पर असर पड़ रहा है।
किसानों और मजदूरों से एकजुटता की अपील
एसकेएम ने किसानों से बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरने और औद्योगिक श्रमिकों के साथ एकजुटता दिखाने की अपील की है। कृषि मजदूर यूनियनों और नरेगा संघर्ष मोर्चा ने भी इस बंद को समर्थन देने की घोषणा की है।
संगठन का कहना है कि यह आंदोलन किसानों और मजदूरों के अधिकारों की रक्षा के लिए है और सरकार को उनकी आवाज सुननी चाहिए।
राहुल गांधी ने जताया समर्थन
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भी इस आंदोलन का समर्थन किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि मजदूरों और किसानों को अपने अधिकारों को लेकर गंभीर चिंताएं हैं। उनके मुताबिक, श्रम संहिताएं मजदूरों के अधिकारों को प्रभावित कर सकती हैं और व्यापार समझौते से किसानों की आजीविका पर असर पड़ सकता है। उन्होंने सरकार से इन मुद्दों पर जवाब देने की मांग की।
बिजली विधेयक और बीज विधेयक पर विवाद
किसान संगठनों का विशेष विरोध बिजली विधेयक-2025 और बीज विधेयक-2025 को लेकर है। उनका आरोप है कि प्रस्तावित बिजली कानून से किसानों और घरेलू उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा और स्मार्ट मीटर अनिवार्य किए जा सकते हैं।
वहीं बीज विधेयक को लेकर आशंका जताई जा रही है कि इससे बहुराष्ट्रीय कंपनियों की भूमिका बढ़ेगी और बीजों की कीमतों पर नियंत्रण कमजोर होगा। किसान संगठनों ने 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने और स्मार्ट मीटर योजना पर पुनर्विचार की मांग की है।
मनरेगा बनाम VB-G RAM G एक्ट
VB-G RAM G एक्ट-2025 को लेकर भी संगठनों ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि यह कानून मनरेगा की जगह ले सकता है, जिससे ग्रामीण रोजगार की गारंटी प्रभावित हो सकती है। प्रदर्शनकारी इसे ग्रामीण गरीबों के अधिकारों पर असर डालने वाला कदम मान रहे हैं।
भारत-US ट्रेड डील पर आपत्ति
संयुक्त किसान मोर्चा ने हालिया भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि इससे कृषि और डेयरी क्षेत्र पर दबाव बढ़ सकता है। कुछ राजनीतिक दलों ने भी इस समझौते पर चिंता जताई है और कहा है कि सस्ते आयात से घरेलू उत्पादकों को नुकसान हो सकता है।
MSP और कर्ज माफी की मांग
एसकेएम ने एक बार फिर सभी फसलों पर C2+50 प्रतिशत फॉर्मूले के आधार पर एमएसपी की कानूनी गारंटी और किसानों की पूर्ण कर्ज माफी की मांग दोहराई है। संगठन का कहना है कि पिछले आंदोलनों के दौरान किए गए वादों को अब तक पूरा नहीं किया गया है।
प्रदर्शन को लेकर अपील
संगठन ने 12 फरवरी को व्यापक विरोध प्रदर्शन की तैयारी की है और इसे मजदूर-किसान एकता का प्रतीक बताया है। उन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें उठाने की अपील की है।
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देशभर में होने वाले इस भारत बंद को लेकर प्रशासन भी सतर्क है। अब देखना होगा कि सरकार और आंदोलनकारी संगठनों के बीच आगे क्या बातचीत होती है और इन मांगों पर क्या फैसला लिया जाता है।









