विश्व शतरंज की सबसे प्रतिष्ठित टीम प्रतियोगिता 46वें FIDE Chess Olympiad 2026 के लिए भारतीय टीम का ऐलान कर दिया गया है। पिछले संस्करण में ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीतने के बाद इस बार भारत ओपन और महिला दोनों वर्गों में अपने खिताब का बचाव करने उतरेगा। खास बात यह है कि महिला वर्ग में भारत को टूर्नामेंट की शीर्ष वरीयता (Top Seed) मिली है, जबकि ओपन वर्ग में टीम दूसरी वरीयता के साथ मैदान में उतरेगी।
इस वर्ष शतरंज ओलंपियाड का आयोजन 15 से 27 सितंबर तक उज्बेकिस्तान के ऐतिहासिक शहर समरकंद में होगा। प्रतियोगिता में रिकॉर्ड 400 टीमें हिस्सा लेंगी, जिनमें ओपन वर्ग की 208 और महिला वर्ग की 192 टीमें शामिल हैं। यह अब तक का सबसे बड़ा शतरंज ओलंपियाड होगा।
ओपन वर्ग में भारत की मजबूत चुनौती
भारतीय ओपन टीम की अगुवाई इस बार अर्जुन एरिगैसी करेंगे। उनके साथ आर. प्रज्ञानानंदा, निहाल सरीन, मौजूदा विश्व चैंपियन डी. गुकेश और विदित गुजराती टीम का हिस्सा हैं। टीम के कप्तान की जिम्मेदारी एक बार फिर ग्रैंडमास्टर श्रीनाथ नारायणन संभालेंगे।
टीम संयोजन में एक बड़ा बदलाव यह है कि निहाल सरीन ने अनुभवी खिलाड़ी पेंटाला हरिकृष्णा की जगह ली है। वहीं, पिछले ओलंपियाड में पहले बोर्ड पर खेलने वाले डी. गुकेश इस बार चौथे बोर्ड पर खेलेंगे।
शानदार फॉर्म में हैं प्रज्ञानानंदा
हाल ही में नॉर्वे चेस 2026 का खिताब जीतने वाले आर. प्रज्ञानानंदा बेहतरीन लय में हैं। उन्होंने टूर्नामेंट से पहले कहा कि भारत का लक्ष्य साफ है—पिछले ओलंपियाड की सफलता को दोहराते हुए लगातार दूसरा स्वर्ण पदक जीतना।
हालांकि यह चुनौती आसान नहीं होगी। ओपन वर्ग में आखिरी बार किसी देश ने लगातार दो ओलंपियाड आर्मेनिया (2006 और 2008) में जीते थे। इसके बाद हर संस्करण में नया चैंपियन देखने को मिला है।
महिला टीम को मिली शीर्ष वरीयता
महिला वर्ग में भारत सबसे अधिक औसत रेटिंग वाली टीम के रूप में टूर्नामेंट की शुरुआत करेगा। टीम में कोनेरू हम्पी, दिव्या देशमुख, आर. वैशाली, वंतिका अग्रवाल और युवा खिलाड़ी सविता श्री बी को जगह दी गई है। टीम की कप्तानी स्वायम्स मिश्रा करेंगे।
इस बार अनुभवी खिलाड़ियों हरिका द्रोणावल्ली और तानिया सचदेव को टीम में शामिल नहीं किया गया है, जबकि कोनेरू हम्पी की वापसी ने भारतीय टीम को और मजबूत बनाया है।
लगातार दूसरा खिताब जीतना होगी बड़ी चुनौती
भारतीय महिला टीम ने पिछले ओलंपियाड में ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया था। दिव्या देशमुख और वंतिका अग्रवाल ने व्यक्तिगत स्वर्ण पदक भी जीते थे, जबकि आर. वैशाली हाल ही में महिला कैंडिडेट्स टूर्नामेंट जीतकर विश्व चैंपियनशिप की दावेदार बनी हैं।
कोनेरू हम्पी का मानना है कि यह भारतीय महिला टीम अब तक की सबसे संतुलित और मजबूत ओलंपियाड टीमों में से एक है। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि चैंपियन बनना जितना कठिन है, उससे कहीं अधिक मुश्किल लगातार दूसरी बार खिताब जीतना होता है।
इन देशों से मिलेगी कड़ी टक्कर
ओपन वर्ग में अमेरिका शीर्ष वरीय टीम है, जबकि भारत दूसरे स्थान पर है। इसके अलावा मेजबान उज्बेकिस्तान, चीन और जर्मनी भी खिताब के प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं।
महिला वर्ग में भारत के बाद जॉर्जिया, चीन, कज़ाखस्तान, अमेरिका और यूक्रेन जैसी मजबूत टीमें पदक की दौड़ में शामिल हैं।
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भारतीय शतरंज की प्रतिष्ठा दांव पर
पिछले कुछ वर्षों में भारतीय शतरंज ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। युवा खिलाड़ियों के उभार और अनुभवी ग्रैंडमास्टर्स के प्रदर्शन ने भारत को विश्व शतरंज की महाशक्तियों में शामिल कर दिया है। ऐसे में समरकंद ओलंपियाड भारतीय टीम के लिए अपनी श्रेष्ठता साबित करने का एक और सुनहरा अवसर होगा।









