केंद्र सरकार ने ग्रामीण विकास और स्थानीय शासन को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए मध्य प्रदेश, झारखंड, पंजाब और मिजोरम को वित्त वर्ष 2025-26 के लिए पंचायती राज संस्थाओं और ग्रामीण स्थानीय निकायों को अनुदान जारी कर दिए हैं। ये राशि पंद्रहवां वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत दी गई है।
राज्यों को कितनी मिली राशि
केंद्र द्वारा जारी अनुदानों में सबसे अधिक हिस्सा मध्य प्रदेश को मिला है। राज्य को बिना शर्त अनुदान की दूसरी किस्त के रूप में 631.91 करोड़ रुपये दिए गए हैं, जो जिला, ब्लॉक और ग्राम पंचायतों में वितरित किए जाएंगे। इसके अलावा, पहले रोके गए हिस्से से अतिरिक्त राशि भी जारी की गई है।
झारखंड को पहली किस्त के रूप में 269.03 करोड़ रुपये प्रदान किए गए हैं, जिससे राज्य की पंचायतों को स्थानीय विकास कार्यों में सहायता मिलेगी। साथ ही, पिछली किस्तों के कुछ रोके गए फंड भी अब जारी किए गए हैं।
पंजाब को दूसरी किस्त के तहत 222 करोड़ रुपये मिले हैं, जो बड़ी संख्या में ग्राम पंचायतों और अन्य स्थानीय निकायों तक पहुंचेंगे। वहीं मिजोरम को 14.80 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं, जो राज्य की ग्राम परिषदों के लिए उपयोगी होंगे।
किस तरह होगा इन फंड का उपयोग
सरकार के अनुसार, बिना शर्त अनुदानों का उपयोग पंचायतें अपनी स्थानीय जरूरतों के अनुसार कर सकेंगी। यह राशि संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची में शामिल 29 विषयों के अंतर्गत विकास कार्यों पर खर्च की जा सकती है, हालांकि वेतन और प्रशासनिक खर्च इसमें शामिल नहीं होंगे।
दूसरी ओर, शर्तबद्ध अनुदानों का उपयोग विशेष रूप से स्वच्छता और पेयजल से जुड़े कार्यों के लिए किया जाएगा। इसमें खुले में शौच मुक्त (ODF) स्थिति बनाए रखना, कचरा प्रबंधन, मल कीचड़ का उपचार, पेयजल आपूर्ति, वर्षा जल संचयन और जल पुनर्चक्रण जैसे कार्य शामिल हैं।
अनुदान जारी करने की प्रक्रिया
इन फंड्स को जारी करने की सिफारिश पंचायती राज मंत्रालय और जल शक्ति मंत्रालय द्वारा की जाती है, जबकि अंतिम स्वीकृति और वितरण वित्त मंत्रालय के माध्यम से होता है। आमतौर पर यह अनुदान एक वित्तीय वर्ष में दो किस्तों में जारी किए जाते हैं।
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ग्रामीण विकास को मिलेगा बढ़ावा
सरकार का मानना है कि इस वित्तीय सहायता से जमीनी स्तर पर प्रशासन को और मजबूती मिलेगी और पंचायतें अपने क्षेत्रों की जरूरतों के अनुसार विकास कार्यों को बेहतर तरीके से लागू कर सकेंगी। इससे ग्रामीण इलाकों में बुनियादी सुविधाओं और जीवन स्तर में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।









