भारत सरकार ने वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री दिनेश त्रिवेदी को बांग्लादेश में भारत का नया उच्चायुक्त नियुक्त किया है। यह नियुक्ति ऐसे समय पर हुई है जब भारत और बांग्लादेश के बीच संबंधों को फिर से मजबूत करने की कोशिशें जारी हैं।
कूटनीतिक संबंधों को नई दिशा देने की कोशिश
दिनेश त्रिवेदी की नियुक्ति को दोनों देशों के बीच भरोसे और संवाद को आगे बढ़ाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों के बाद भारत-बांग्लादेश संबंधों में कुछ ठंडापन आया था, लेकिन नई सरकार के गठन के बाद रिश्तों में सुधार के संकेत मिल रहे हैं।
बांग्लादेश में हाल ही में हुए राजनीतिक बदलावों के बाद तारिक रहमान के नेतृत्व में नई सरकार बनी है। इसके साथ ही दोनों देशों ने आपसी सहयोग और साझेदारी को फिर से गति देने की इच्छा जताई है।
अनुभवी नेता को मिली जिम्मेदारी
दिनेश त्रिवेदी का राजनीतिक और प्रशासनिक अनुभव इस पद के लिए अहम माना जा रहा है। वे यूपीए सरकार के दौरान रेल मंत्री और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं।
वे प्रणय वर्मा की जगह लेंगे, जिन्होंने अपने कार्यकाल में द्विपक्षीय संबंधों को संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
राजनीतिक सफर पर एक नजर
दिनेश त्रिवेदी पश्चिम बंगाल की बैरकपुर लोकसभा सीट से लगातार दो बार सांसद रहे हैं। इसके अलावा वे कई बार राज्यसभा के सदस्य भी रहे।
2012 में रेल बजट के दौरान किराया बढ़ाने के प्रस्ताव पर विवाद खड़ा हुआ था, जिसके चलते उन्हें पद छोड़ना पड़ा। उस समय ममता बनर्जी ने इस फैसले का कड़ा विरोध किया था। बाद में मुकुल रॉय को रेल मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई।
बदला राजनीतिक दल
2021 में दिनेश त्रिवेदी ने टीएमसी से इस्तीफा देकर बीजेपी का दामन थाम लिया था। इसके बाद से वे राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
भारत-बांग्लादेश संवाद जारी
नए उच्चायुक्त की नियुक्ति से पहले प्रणय वर्मा ने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान से मुलाकात कर द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा की थी। इस बैठक में दोनों देशों के हितों और सहयोग के क्षेत्रों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।
भारत की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि वह बांग्लादेश के साथ सकारात्मक, व्यावहारिक और भविष्य उन्मुख संबंध बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
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आगे की राह
विशेषज्ञों का मानना है कि दिनेश त्रिवेदी का अनुभव और राजनीतिक समझ भारत-बांग्लादेश संबंधों को नई मजबूती दे सकती है। आने वाले समय में व्यापार, सुरक्षा और क्षेत्रीय सहयोग के मुद्दों पर दोनों देशों के बीच बेहतर तालमेल देखने को मिल सकता है।









