उत्तर प्रदेश के महोबा जिले में सत्ताधारी दल के भीतर एक गंभीर विवाद सामने आया है, जिसने स्थानीय राजनीति में हलचल मचा दी है। बीजेपी के एक जिला पदाधिकारी पर पूर्व महिला पदाधिकारी ने गंभीर आरोप लगाए हैं, जिनके बाद मामला पुलिस तक पहुंच गया है।
महिला नेता ने लगाए गंभीर आरोप
पूर्व जिला मंत्री रह चुकी महिला ने जिला अध्यक्ष मोहनलाल कुशवाहा पर पद के बदले अनुचित दबाव बनाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि जिला उपाध्यक्ष पद देने के बदले उनसे आपत्तिजनक मांग की गई। आरोप है कि इनकार करने पर उन्हें पद से हटाने और राजनीतिक नुकसान पहुंचाने की धमकी दी गई।
महिला ने यह भी दावा किया कि उन्हें बाहर के शहरों में साथ चलने के लिए कहा गया और उनकी बात न मानने पर दबाव बनाया गया।
अन्य पदाधिकारियों पर भी आरोप
पीड़िता ने संगठन के दो अन्य पदाधिकारियों पर भी आरोप लगाए हैं कि उन्होंने जिला अध्यक्ष की बात मानने के लिए उन पर दबाव डाला। महिला का कहना है कि लंबे समय तक पार्टी से जुड़े रहने के बावजूद उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया।
पुलिस अधीक्षक से की शिकायत
मामला तब और गंभीर हो गया जब महिला ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर लिखित शिकायत दी। उन्होंने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की है। पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद मामले को जांच में लिया है।
जिलाध्यक्ष ने आरोपों को बताया निराधार
दूसरी ओर मोहनलाल कुशवाहा ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए इसे साजिश करार दिया है। उनका कहना है कि उनकी छवि खराब करने के उद्देश्य से झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं और इसमें कोई सच्चाई नहीं है।
संगठन में बढ़ी हलचल, विपक्ष हमलावर
इस मामले के सामने आने के बाद पार्टी के स्थानीय नेता फिलहाल चुप्पी साधे हुए हैं। वहीं विपक्ष ने इस मुद्दे को लेकर सत्ताधारी दल पर निशाना साधना शुरू कर दिया है और संगठन में महिलाओं की स्थिति पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
समर्थन और विरोध दोनों जारी
इस विवाद के बीच कुछ संगठन और सामाजिक समूह जिला अध्यक्ष के समर्थन में सामने आए हैं। उनका कहना है कि आरोप राजनीतिक द्वेष से प्रेरित हैं और निष्पक्ष जांच के बाद सच्चाई सामने आनी चाहिए। वहीं महिला के पक्ष में भी निष्पक्ष कार्रवाई की मांग उठ रही है।
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मामले ने महोबा की राजनीति को गर्मा दिया है। अब नजर इस बात पर है कि पार्टी नेतृत्व और प्रशासन इस पूरे प्रकरण में क्या रुख अपनाते हैं। जांच के निष्कर्ष ही तय करेंगे कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और आगे क्या कार्रवाई होगी।









