भारतीय सर्राफा बाजार में हफ्ते की शुरुआत तेज मजबूती के साथ हुई है। सोमवार, 9 फरवरी को सोना और चांदी दोनों की कीमतों में जोरदार तेजी दर्ज की गई। यह उछाल ऐसे समय देखने को मिला है, जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी डॉलर कमजोर हो रहा है और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं।
इसके अलावा, बाजार की नजरें अमेरिका से आने वाले महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़ों पर टिकी हुई हैं, जो आगे ब्याज दरों की दिशा तय कर सकते हैं।
MCX पर सोना और चांदी की कीमतें
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला। चांदी करीब 4.93 प्रतिशत की बढ़त के साथ 2,62,212 रुपये प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गई। वहीं सोने में भी मजबूती दर्ज की गई और यह 1.50 प्रतिशत यानी 2,335 रुपये की तेजी के साथ 1,57,786 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता नजर आया।
आगे कैसी रह सकती है चाल?
बीते कुछ समय में सोना और चांदी की कीमतों में दबाव देखा गया था, लेकिन अब दोनों धातुओं में फिर से मजबूती के संकेत मिल रहे हैं। फिलहाल MCX पर चांदी के फ्यूचर्स 2,50,000 से 2,70,000 रुपये प्रति किलो के दायरे में बने हुए हैं। इससे पहले यह करीब 4,20,000 रुपये प्रति किलो के ऊपरी स्तर तक पहुंच चुकी थी।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि भारी गिरावट के बाद चांदी ने खुद को स्थिर किया है और आने वाले महीनों में इसके दाम 3,00,000 से 3,25,000 रुपये प्रति किलो तक जा सकते हैं।
निवेशकों के लिए क्या है सही रणनीति?
निवेश के लिहाज से जानकार फिलहाल संतुलित और सतर्क रणनीति अपनाने की सलाह दे रहे हैं। जिन निवेशकों ने पहले से सोने में निवेश कर रखा है, उनके लिए इसे होल्ड करना समझदारी भरा कदम माना जा रहा है, क्योंकि लंबी अवधि में सोना अपेक्षाकृत सुरक्षित रिटर्न देता है।
वहीं जो निवेशक नई खरीदारी करने की योजना बना रहे हैं, उन्हें तेजी के दौरान जल्दबाजी करने के बजाय संभावित गिरावट का इंतजार करना चाहिए।
तेजी के पीछे ये हैं बड़ी वजहें
सोने की कीमतों में मौजूदा उछाल की एक अहम वजह इसका हालिया उच्च स्तर से नीचे आना भी है, जिससे खरीदारी का आकर्षण बढ़ा है। इसके अलावा अमेरिकी डॉलर की कमजोरी, वैश्विक आर्थिक अस्थिरता और अमेरिका के श्रम बाजार से जुड़े आंकड़ों को लेकर बनी अनिश्चितता भी निवेशकों को सोना-चांदी जैसे सुरक्षित विकल्पों की ओर ले जा रही है।
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विशेषज्ञों के अनुसार, ये सभी फैक्टर आगे चलकर ब्याज दरों की नीति को प्रभावित कर सकते हैं, जिसका सीधा असर कीमती धातुओं की कीमतों पर पड़ेगा।







