हिमाचल प्रदेश में इस साल के अंत में होने वाले पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। सरकार ने आरक्षण रोस्टर को लेकर अधिसूचना जारी कर दी है, जिसके अनुसार इस बार अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) वर्गों को उनकी जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण दिया जाएगा।
इसके अलावा, महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया गया है, जबकि अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को अधिकतम 15 प्रतिशत आरक्षण ही मिलेगा। आरक्षण का यह निर्धारण जनगणना 2011 के आंकड़ों के आधार पर किया जाएगा।
जिला कांगड़ा में 811 पंचायतों के लिए तैयारी शुरू
हिमाचल के सबसे बड़े जिले कांगड़ा में पंचायती राज चुनावों की तैयारी को लेकर पंचायत अधिकारी कार्यालय सक्रिय हो गया है। जिले की 811 ग्राम पंचायतों में अब SC-ST की जनसंख्या के अनुसार वार्डों और पदों पर आरक्षण निर्धारित किया जाएगा।
OBC आरक्षण को लेकर भी संबंधित पंचायत या क्षेत्र की जनसंख्या का ही आधार माना जाएगा। जहां किसी वर्ग की जनसंख्या 5 प्रतिशत से कम है, वहां उस वर्ग को आरक्षण नहीं मिलेगा।
परिसीमन में फंसा पेंच
हालांकि अभी तक ब्लॉक समिति वार्डों को लेकर तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाई है। नगरोटा सूरियां और फतेहपुर ब्लॉक में परिसीमन प्रक्रिया अटकी हुई है। प्रशासन का कहना है कि जल्द ही इस प्रक्रिया को पूर्ण कर लिया जाएगा, ताकि रोस्टर लागू करने में कोई बाधा न आए।
किस आधार पर तय होता है आरक्षण?
- वार्ड सदस्य पद: संबंधित ग्राम पंचायत की जनसंख्या
- पंचायत प्रधान और ब्लॉक समिति: विकास खंड के तहत कुल जनसंख्या
- जिला परिषद वार्ड: जिले की कुल जनसंख्या
इन्हीं आंकड़ों के आधार पर आरक्षित वर्गों के लिए सीटें चिह्नित की जाएंगी।
अधिकारियों की प्रतिक्रिया
विक्रम सिंह, जिला पंचायत अधिकारी, कांगड़ा ने जानकारी देते हुए बताया कि आरक्षण रोस्टर की अधिसूचना जारी हो चुकी है। अब जिला कांगड़ा में वार्ड पंच से लेकर जिला परिषद तक के लिए आरक्षण रोस्टर तैयार किया जाएगा। SC-ST को उनकी आबादी के अनुपात में आरक्षण दिया जाएगा, महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा और OBC को 15 प्रतिशत से अधिक आरक्षण नहीं दिया जाएगा।
यह भी पढ़ें: बिहार STET 2025 का नोटिफिकेशन जारी, 11 सितंबर से शुरू होंगे आवेदन, जानें पूरी प्रक्रिया और परीक्षा शेड्यूल
आरक्षण रोस्टर को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश सामने आने के बाद अब पंचायत चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी और प्रतिनिधित्वपूर्ण बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। आरक्षण निर्धारण से पहले जनसंख्या के आधार पर सटीक आंकड़े जुटाने और परिसीमन प्रक्रिया पूरी करने पर प्रशासन का फोकस है।









