हिमाचल प्रदेश पंचायत चुनाव की तैयारियां तेज हो गई हैं। हिमाचल प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग ने 3754 पंचायतों के लिए चुनाव कार्यक्रम जारी कर दिया है, जिसके तहत मतदान तीन चरणों में कराया जाएगा।
आयोग के अनुसार नामांकन प्रक्रिया 7, 8 और 11 मई को सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक चलेगी। इसके बाद 12 मई को नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी, जबकि 14 मई तक उम्मीदवार अपना नाम वापस ले सकेंगे। 15 मई को चुनाव चिन्हों का आवंटन किया जाएगा। मतदान सुबह 7 बजे से दोपहर 3 बजे तक होगा।
राज्य के निर्वाचन अधिकारी अनिल खाची ने बताया कि पहले चरण का मतदान 26 मई, दूसरे चरण का 28 मई और तीसरे चरण का मतदान 30 मई को होगा। प्रधान, उप प्रधान और वार्ड सदस्यों के वोटों की गिनती मतदान के दिन ही पूरी कर ली जाएगी, जबकि पंचायत समिति और जिला परिषद के परिणाम 31 मई को विकास खंड मुख्यालयों में घोषित किए जाएंगे।
इस चुनाव में कुल 31,182 पदों पर मतदान होगा। इनमें 3754 प्रधान और उप प्रधान के पद, 21,654 वार्ड सदस्य, 1769 पंचायत समिति सदस्य और 251 जिला परिषद सदस्य शामिल हैं। कुल्लू जिले की चार पंचायतों को छोड़कर राज्य की लगभग सभी पंचायतों में चुनाव कराए जाएंगे।
आरक्षण की बात करें तो अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए बड़ी संख्या में सीटें आरक्षित की गई हैं। महिलाओं के लिए भी विशेष प्रावधान किए गए हैं और कुल 15,656 पद महिलाओं के लिए सुरक्षित रखे गए हैं, जो स्थानीय स्तर पर उनकी भागीदारी को मजबूत करेंगे।
मतदाताओं की संख्या भी काफी बड़ी है। राज्य में कुल 50 लाख से अधिक मतदाता पंजीकृत हैं, जिनमें पुरुष और महिला मतदाताओं की संख्या लगभग बराबर है। पांवटा साहिब की भाटावाली पंचायत में सबसे अधिक मतदाता हैं, जबकि पूह क्षेत्र की सुमरा पंचायत में सबसे कम मतदाता दर्ज किए गए हैं।
चुनाव प्रक्रिया को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए 21,678 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। लाहौल स्पीति जिले के काजा क्षेत्र की लांगना-कौमिक पंचायत में देश के सबसे ऊंचे मतदान केंद्रों में से एक स्थापित किया गया है, जो समुद्र तल से 4587 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।
मतदान के दिन राज्य में सार्वजनिक अवकाश घोषित रहेगा। साथ ही चुनाव की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए आदर्श आचार संहिता लागू कर दी गई है। चुनावी खर्च की सीमा भी निर्धारित की गई है, विशेष रूप से जिला परिषद उम्मीदवारों के लिए एक लाख रुपये तक की सीमा तय की गई है।
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कुल मिलाकर, हिमाचल प्रदेश में होने वाले ये पंचायत चुनाव ग्रामीण लोकतंत्र को नई दिशा देने वाले माने जा रहे हैं, जिनमें व्यापक भागीदारी की उम्मीद की जा रही है।









