असम में विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत हासिल करने के बाद हिमंत बिस्वा सरमा ने मंगलवार को दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इसके साथ ही वह राज्य में लगातार दो कार्यकाल तक मुख्यमंत्री बनने वाले पहले गैर-कांग्रेसी नेता बन गए हैं।
गुवाहाटी में आयोजित भव्य समारोह में राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत बीजेपी और एनडीए शासित राज्यों के कई मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री मौजूद रहे।
लगातार तीसरी बार सत्ता में NDA
असम में यह एनडीए सरकार का लगातार तीसरा कार्यकाल है। 2016 में पहली बार बीजेपी के नेतृत्व में सरकार बनी थी, जब सर्बानंद सोनोवाल मुख्यमंत्री बने थे। इसके बाद 2021 में हिमंत बिस्वा सरमा ने राज्य की कमान संभाली और अब एक बार फिर सत्ता में वापसी की है।
राज्यपाल ने 10 मई को उन्हें एनडीए विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद सरकार बनाने का न्योता दिया था।
शपथ ग्रहण में जुटे कई बड़े नेता
शपथ ग्रहण समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए।
इसके अलावा एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री भी समारोह में पहुंचे।
इन नेताओं ने भी ली मंत्री पद की शपथ
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के साथ कई नेताओं ने मंत्री पद की शपथ ली, जिनमें रामेश्वर तेली, अतुल बोरा, चरन बोरो और अजंता नियोग शामिल हैं।
कांग्रेस छोड़ बीजेपी में आए थे हिमंत
हिमंत बिस्वा सरमा का राजनीतिक सफर काफी दिलचस्प रहा है। उन्होंने 2015 में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी का दामन थामा था। उस समय असम में कांग्रेस का दबदबा था और बीजेपी के पास सीमित राजनीतिक ताकत थी।
बीजेपी में शामिल होने के बाद उन्होंने पूर्वोत्तर में पार्टी को मजबूत करने की रणनीति तैयार की। 2016 में उन्हें नॉर्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस (NEDA) का संयोजक बनाया गया, जिसके बाद उन्होंने क्षेत्रीय दलों को बीजेपी के साथ जोड़ने में अहम भूमिका निभाई।
छात्र राजनीति से शुरू हुआ सफर
हिमंत बिस्वा सरमा की शुरुआती शिक्षा गुवाहाटी में हुई। उन्होंने राजनीति विज्ञान में स्नातक और परास्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद कानून की शिक्षा हासिल की और कुछ समय तक वकालत भी की।
उनका राजनीतिक सफर छात्र राजनीति से शुरू हुआ था। वह छात्र संगठनों से जुड़े रहे और बाद में कांग्रेस में सक्रिय राजनीति में आए। 2001 में वह पहली बार जालुकबारी सीट से विधायक चुने गए और तब से लगातार इस सीट पर जीत दर्ज करते आ रहे हैं।
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राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पूर्वोत्तर भारत में बीजेपी के विस्तार के पीछे हिमंत बिस्वा सरमा की रणनीति और संगठन क्षमता का बड़ा योगदान रहा है।









