कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शनिवार को दिल्ली में आयोजित कांग्रेस के वार्षिक लीगल कॉन्क्लेव 2025 को संबोधित किया , जिसमें उन्होंने कार्यकर्ताओं को लोकतांत्रिक मूल्यों की याद दिलाते हुए नारेबाज़ी पर उन्हें टोक दिया। जब कुछ समर्थकों ने नारा लगाया – ‘देश का राजा कैसा हो, राहुल गांधी जैसा हो’, तो राहुल गांधी ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए कहा, “मैं राजा नहीं हूं, और राजा बनना भी नहीं चाहता हूं। मैं राजा के कॉन्सेप्ट के ही खिलाफ हूं।”
लोकतंत्र में ‘बराबरी’ की बात
राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है जहां हर नागरिक समान है। उन्होंने कहा, “राजा बनाने की सोच ही लोकतंत्र के खिलाफ है। हमारा संविधान बराबरी की बात करता है, न कि किसी के विशेष बनने की।” उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को सलाह दी कि वे व्यक्तिपूजा से दूर रहें और संविधान के मूल्यों की रक्षा करें।
वकीलों की भूमिका पर जोर
अपने संबोधन में राहुल गांधी ने स्वतंत्रता संग्राम में वकीलों की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा, “अगर वकील न होते, तो न देश आज़ाद होता और न ही हमें संविधान मिलता।” उन्होंने वकीलों से आग्रह किया कि वे मौजूदा संकट की घड़ी में देश की लोकतांत्रिक संरचना की रक्षा में आगे आएं।
चुनावी धांधली पर बड़ा दावा
राहुल गांधी ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा कि उनकी पार्टी के पास लोकसभा चुनाव 2024 में गड़बड़ी के ठोस सबूत हैं और उन्हें जल्द सार्वजनिक किया जाएगा। उन्होंने कहा, “हम आपको अगले कुछ दिनों में दिखाएंगे कि चुनाव कैसे रिग किए गए। भाजपा बहुत ही मामूली बहुमत से सत्ता में आई है।”
’15 सीटें हेराफेरी से जीती गईं’
राहुल गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि बीजेपी ने कम से कम 15 लोकसभा सीटें धांधली करके जीतीं। उन्होंने कहा, “अगर ये सीटें हेराफेरी से न जीती जातीं, तो प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंचना संभव नहीं था। चुनावी व्यवस्था लगभग मृत हो चुकी है।”

कृषि कानूनों के विरोध पर धमकी का आरोप
राहुल गांधी ने पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली पर भी आरोप लगाया कि कृषि कानूनों के विरोध के दौरान उन्हें डराने की कोशिश की गई थी। उन्होंने कहा, “जब हम तीन कृषि कानूनों के खिलाफ खड़े हुए थे, तब हमें धमकाया गया। अरुण जेटली को भेजा गया ताकि हम पीछे हट जाएं, लेकिन हमने हार नहीं मानी।”
लोकतंत्र की रक्षा की अपील
अपने पूरे संबोधन में राहुल गांधी का मुख्य संदेश था – संविधान, लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों की रक्षा करना हर जिम्मेदार नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने कार्यकर्ताओं और वकीलों से आह्वान किया कि वे इस लड़ाई में कांग्रेस का साथ दें और देश को ‘एकतरफा सत्ता’ से बचाएं।
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राहुल गांधी का यह भाषण न केवल राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण था, बल्कि पार्टी कार्यकर्ताओं को एक नई दिशा देने की कोशिश भी थी। उन्होंने अपनी नेतृत्व शैली को “जनता के बीच का व्यक्ति” बताते हुए स्पष्ट किया कि सत्ता की चाह नहीं, बल्कि लोकतंत्र की रक्षा उनका उद्देश्य है।









