संसद के बजट सत्र के दौरान ‘एपस्टीन फाइल्स’ का मुद्दा उठने के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा इस विषय का जिक्र किए जाने के बाद केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने सामने आकर अपनी सफाई दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी जेफरी एपस्टीन से हुई मुलाकातें पूरी तरह आधिकारिक और सार्वजनिक दायरे में थीं।
क्या है पूरा मामला?
बुधवार (11 फरवरी 2026) को लोकसभा में बजट चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने ‘एपस्टीन फाइल्स’ का जिक्र करते हुए कुछ उद्योगपतियों और नेताओं के नामों पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका के न्याय विभाग के पास मौजूद दस्तावेजों में कुछ भारतीय नाम शामिल हैं।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए हरदीप पुरी ने कहा कि युवा नेता को यह समझना चाहिए कि ‘एपस्टीन फाइल्स’ गंभीर आपराधिक आरोपों और यौन शोषण से जुड़े मामलों से संबंधित हैं, और उनकी मुलाकातों का उन आरोपों से कोई संबंध नहीं था।
हरदीप पुरी ने क्या कहा?
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि वर्ष 2009 में जब वे अमेरिका में भारत के राजदूत थे, तब अंतरराष्ट्रीय पीस इंस्टिट्यूट (IPI) के एक प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के रूप में उनकी एपस्टीन से मुलाकात हुई थी।
उन्होंने कहा:
- मुलाकातें आधिकारिक कार्यक्रमों के तहत हुई थीं।
- 3 से 4 बार की बैठकों का जिक्र सार्वजनिक दस्तावेजों में मौजूद है।
- बाद में वे मंत्री बने, लेकिन ये मुलाकातें उनके राजनयिक कार्यकाल के दौरान हुई थीं।
पुरी ने यह भी कहा कि लाखों ईमेल और दस्तावेज सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध हैं, जिनसे पूरी स्थिति स्पष्ट होती है।
राहुल गांधी के आरोप
राहुल गांधी ने संसद में कहा कि कुछ बड़े उद्योगपतियों के नाम एपस्टीन फाइल्स में होने के बावजूद उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई। उन्होंने हरदीप पुरी से भी सवाल किया कि कुछ मुलाकातें किस संदर्भ में हुईं।
सदन के बाहर मीडिया से बात करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि अमेरिकी न्याय विभाग के पास मौजूद फाइलों में भारतीय नामों का उल्लेख है।
‘बेबुनियाद आरोप लगाने की आदत’
हरदीप पुरी ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि राहुल गांधी को बिना आधार के आरोप लगाने की आदत है। उन्होंने यह भी बताया कि नवंबर 2014 में वे एक आम नागरिक थे और उस समय एक परिचित के जरिए उनकी मुलाकात लिंक्डइन के संस्थापक रीड हॉफमैन से हुई थी।
पुरी के अनुसार, उन्होंने उस दौरान भारत में निवेश और अवसरों पर चर्चा की थी और देश में हो रहे बदलावों की जानकारी दी थी।
राजनीतिक बहस तेज
एपस्टीन फाइल्स को लेकर संसद में उठे इस मुद्दे ने राजनीतिक बहस को नया मोड़ दे दिया है। जहां विपक्ष पारदर्शिता की मांग कर रहा है, वहीं सरकार इसे निराधार आरोप करार दे रही है। आने वाले दिनों में इस विषय पर और बयानबाजी और स्पष्टीकरण देखने को मिल सकते हैं।
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फिलहाल, केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने साफ कर दिया है कि उनकी मुलाकातें राजनयिक दायित्वों के तहत थीं और उनका किसी भी अवैध गतिविधि से कोई संबंध नहीं है।








