केरल की सियासत में एक ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला है। शुक्रवार को बीजेपी नेता वीवी राजेश ने तिरुवनंतपुरम के महापौर (मेयर) पद की शपथ लेकर राज्य की शहरी राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी। यह पहली बार है जब राज्य की राजधानी में बीजेपी ने महापौर पद पर कब्जा किया है, जिससे दशकों पुराना राजनीतिक संतुलन बदलता नजर आ रहा है।
शपथ के बाद विकास का भरोसा
पदभार संभालने के बाद अपने पहले संबोधन में वीवी राजेश ने कहा कि उनका लक्ष्य सभी को साथ लेकर शहर के विकास को आगे बढ़ाना है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि तिरुवनंतपुरम के सभी 101 वार्डों में समान रूप से विकास कार्य किए जाएंगे और राजधानी को एक आधुनिक व विकसित शहर के रूप में आगे बढ़ाया जाएगा।
खास बात यह है कि राजेश ऐसे समय में महापौर बने हैं, जब केरल विधानसभा चुनाव में छह महीने से भी कम समय बचा है, जिससे इस जीत के राजनीतिक मायने और बढ़ गए हैं।
केरल में बीजेपी की स्थिति
केरल लंबे समय से वामपंथी दलों का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है, जहां बीजेपी को अब तक सीमित सफलता ही मिली है। राज्य विधानसभा में पार्टी का अब तक केवल एक विधायक रहा है—ओ. राजगोपाल, जिन्होंने 2016 में नेमोम सीट से जीत दर्ज की थी। वहीं लोकसभा में बीजेपी का प्रतिनिधित्व अभिनेता सुरेश गोपी करते हैं, जिन्होंने 2024 के चुनाव में त्रिशूर सीट पर जीत हासिल की थी।
मतदान में कैसे मिली जीत
महापौर पद के लिए हुए चुनाव में बीजेपी उम्मीदवार वीवी राजेश को कुल 51 वोट मिले, जो बहुमत के आंकड़े से एक अधिक थे। सीपीआईएम के उम्मीदवार आर.पी. शिवाजी को 29 वोट मिले, जबकि कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ के उम्मीदवार के.एस. सबरीनाथन को 19 वोट प्राप्त हुए। एक पार्षद मतदान में शामिल नहीं हुआ। एक निर्दलीय पार्षद के समर्थन से बीजेपी को निर्णायक बढ़त मिली और जीत सुनिश्चित हो सकी।
45 साल का वामपंथी कब्जा खत्म
वीवी राजेश का महापौर बनना सिर्फ एक पद परिवर्तन नहीं, बल्कि तिरुवनंतपुरम की राजनीति में एक युगांतकारी बदलाव माना जा रहा है। इस जीत के साथ ही नगर निगम पर सीपीआईएम का करीब 45 वर्षों से चला आ रहा नियंत्रण समाप्त हो गया।
समारोह के बाद केरल बीजेपी अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि वामपंथी दलों ने कांग्रेस के अप्रत्यक्ष समर्थन से राजधानी को नुकसान पहुंचाया है और अब शहर को नई दिशा देने का समय आ गया है।
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तिरुवनंतपुरम में बीजेपी की यह जीत केरल की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत के तौर पर देखी जा रही है, जिसका असर आने वाले विधानसभा चुनावों में भी दिखाई दे सकता है।









