केरल में स्थानीय निकाय चुनावों की मतगणना जारी है और शुरुआती नतीजों में कांग्रेस नीत यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) ने बढ़त बना ली है। वहीं राजधानी तिरुवनंतपुरम में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाला एनडीए मजबूत स्थिति में नजर आ रहा है। इन चुनावों को अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक दलों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।
राज्य में 11 और 13 नवंबर को दो चरणों में मतदान हुआ था, जिसमें कुल 73.57 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। इन नतीजों के आधार पर राजनीतिक दल आने वाले विधानसभा चुनाव के लिए अपनी रणनीति और प्रचार की दिशा तय करेंगे।
यूडीएफ सबसे आगे, एलडीएफ दूसरे स्थान पर
ताजा रुझानों के मुताबिक यूडीएफ ने ग्राम पंचायत, ब्लॉक पंचायत, जिला पंचायत, नगरपालिका और नगर निगम स्तर पर बढ़त बनाई है। यूडीएफ ने ग्राम पंचायतों में 7,451 सीटें, ब्लॉक पंचायतों में 1,063, जिला पंचायतों में 59, नगरपालिकाओं में 1,458 और नगर निगमों में 187 वार्डों में जीत दर्ज की है।
सत्तारूढ़ लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) दूसरे स्थान पर बना हुआ है। एलडीएफ ने ग्राम पंचायतों में 6,137, ब्लॉक पंचायतों में 823, जिला पंचायतों में 30, नगरपालिकाओं में 1,100 और नगर निगमों में 125 वार्ड अपने नाम किए हैं।
बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए ने भी कई क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। एनडीए ने ग्राम पंचायतों में 1,363, ब्लॉक पंचायतों में 50, जिला पंचायत में 1, नगरपालिका में 324 और नगर निगमों में 93 वार्ड जीते हैं। इसके अलावा निर्दलीय और अन्य उम्मीदवारों ने भी उल्लेखनीय संख्या में सीटें हासिल की हैं।
तिरुवनंतपुरम नगर निगम में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत
राजधानी तिरुवनंतपुरम नगर निगम के नतीजे सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। यहां बीजेपी ने बड़ा उलटफेर करते हुए सीपीएम के नेतृत्व वाले एलडीएफ से निगम छीन लिया है। 45 वर्षों से चले आ रहे वामपंथी शासन का अंत करते हुए बीजेपी ने इतिहास रच दिया है।
101 वार्डों वाले तिरुवनंतपुरम नगर निगम में बीजेपी ने 50 वार्डों में जीत हासिल की है, जबकि एलडीएफ को 29 और यूडीएफ को 19 वार्ड मिले हैं। दो वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है। बीजेपी महज एक सीट से पूर्ण बहुमत से पीछे रह गई है, लेकिन इसके बावजूद यह जीत पार्टी के लिए बड़ी राजनीतिक उपलब्धि मानी जा रही है।
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इन नतीजों से साफ है कि केरल की राजनीति में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं और स्थानीय चुनावों के नतीजे विधानसभा चुनाव की तस्वीर को काफी हद तक प्रभावित कर सकते हैं।








