सिगरेट पर सरकार द्वारा एक्साइज ड्यूटी बढ़ाए जाने का असर शेयर बाजार में साफ दिखाई देने लगा है। इस फैसले के बाद एफएमसीजी दिग्गज ITC के शेयरों में लगातार दो दिनों तक तेज बिकवाली देखने को मिली, जिससे सरकारी बीमा कंपनियों, खासकर भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) को बड़ा नुकसान झेलना पड़ा है।
2 जनवरी को ITC का शेयर करीब 5 प्रतिशत टूटकर 345.25 रुपये के स्तर तक आ गया, जो इसका 52 हफ्तों का नया निचला स्तर है। हालांकि, कारोबार के अंत तक इसमें थोड़ी रिकवरी जरूर हुई। साल 2026 के पहले दो ट्रेडिंग सेशनों में ही ITC के शेयर कुल मिलाकर 14 प्रतिशत से ज्यादा गिर चुके हैं।
शेयर गिरते ही निवेशकों में हलचल
जुलाई–सितंबर तिमाही (FY26) के शेयरहोल्डिंग पैटर्न के अनुसार, ITC पूरी तरह पब्लिक शेयरहोल्डिंग वाली कंपनी है और इसमें कोई प्रमोटर नहीं है। कंपनी में सबसे बड़ी हिस्सेदारी LIC के पास है, जो करीब 15.86 प्रतिशत है। इसके अलावा जनरल इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (GIC) के पास 1.73 प्रतिशत और न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के पास 1.4 प्रतिशत हिस्सेदारी मौजूद है।
शेयरों में आई तेज गिरावट के चलते LIC के निवेश मूल्य में बड़ा झटका लगा है। 31 दिसंबर को ITC में LIC की हिस्सेदारी की कीमत करीब 80,028 करोड़ रुपये थी, जो अब घटकर लगभग 68,560 करोड़ रुपये रह गई है। यानी केवल दो दिनों में LIC को करीब 11,468 करोड़ रुपये का कागजी नुकसान हुआ है।
सरकारी बीमा कंपनियों को कुल 13,740 करोड़ का झटका
ITC के शेयरों में बिकवाली का असर सिर्फ LIC तक सीमित नहीं रहा। LIC, GIC और न्यू इंडिया एश्योरेंस – इन तीनों सरकारी बीमा कंपनियों के पोर्टफोलियो से मिलाकर करीब 13,740 करोड़ रुपये की वैल्यू दो दिनों में घट गई। हालांकि, यह नुकसान अभी केवल नॉशनल यानी कागजी है, क्योंकि जब तक शेयर बेचे नहीं जाते, तब तक वास्तविक घाटा नहीं माना जाता।
मार्केट कैप से उड़ गए 72 हजार करोड़ रुपये
2 जनवरी को ITC का शेयर लगभग 4 प्रतिशत गिरकर 350.10 रुपये पर बंद हुआ। बीते पांच कारोबारी दिनों में स्टॉक 13 प्रतिशत से ज्यादा और पिछले छह महीनों में 15 प्रतिशत से अधिक टूट चुका है। इस गिरावट के चलते सिर्फ दो दिनों में कंपनी के बाजार पूंजीकरण से करीब 72,000 करोड़ रुपये साफ हो गए हैं। फिलहाल ITC का मार्केट कैप करीब 4.38 लाख करोड़ रुपये के आसपास है और स्टॉक का पी/ई रेश्यो लगभग 22.6 बना हुआ है।
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कुल मिलाकर, एक्साइज ड्यूटी में बढ़ोतरी ने ITC के शेयरों पर जबरदस्त दबाव बनाया है, जिसका सीधा असर सरकारी बीमा कंपनियों के निवेश पर देखने को मिला है।







