महाराष्ट्र की 29 महानगरपालिकाओं के चुनावी रुझान अब लगभग अंतिम नतीजों में तब्दील हो रहे हैं और इन नतीजों ने राज्य की राजनीति में बड़ा उलटफेर कर दिया है। मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) समेत राज्य की अधिकांश नगरपालिकाओं में बीजेपी के नेतृत्व वाली महायुति ने निर्णायक बढ़त हासिल की है।
बीएमसी में 20 वर्षों से चला आ रहा उद्धव ठाकरे की अविभाजित शिवसेना का शासन समाप्त होता नजर आ रहा है, और यहां महायुति का मेयर बनना लगभग तय माना जा रहा है।
बीएमसी में बदला सत्ता का समीकरण
मुंबई में बीजेपी और एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा था, जबकि महायुति में शामिल अजित पवार गुट ने अलग चुनाव लड़ा। नतीजों के मुताबिक मुंबई में बीजेपी 88 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। शिवसेना (शिंदे) को 27 सीटें, शिवसेना (यूबीटी) को 72 सीटें, कांग्रेस को 15 सीटें, एनसीपी (एसपी) को 1 सीट और मनसे को 8 सीटें मिली हैं। इन आंकड़ों ने साफ कर दिया है कि बीएमसी में अब सत्ता परिवर्तन तय है।
पूरे राज्य में महायुति का दबदबा
राज्य की 29 महानगरपालिकाओं में से ज्यादातर में बीजेपी और महायुति ने मजबूत प्रदर्शन किया है।
- मीरा-भायंदर: बीजेपी 44 सीटों के साथ स्पष्ट बहुमत में
- पनवेल: बीजेपी 24, कांग्रेस 4
- नांदेड: बीजेपी 32, कांग्रेस 12, शिवसेना 10
- नागपुर: बीजेपी 109 सीटों के साथ ऐतिहासिक जीत
- पुणे: बीजेपी 90, एनसीपी 20, कांग्रेस 8
- नवी मुंबई: बीजेपी 72, शिवसेना 28
- पिंपरी-चिंचवड: बीजेपी 83, एनसीपी 37
इन शहरों में बीजेपी ने न सिर्फ बढ़त बनाई बल्कि विपक्ष को काफी पीछे छोड़ दिया।
कुछ शहरों में कड़ा मुकाबला
कुछ महानगरपालिकाओं में मुकाबला अपेक्षाकृत संतुलित रहा।
- कल्याण-डोंबिवली: शिवसेना (शिंदे) 35, बीजेपी 32
- ठाणे: शिवसेना (शिंदे) 29, बीजेपी 6
- भिवंडी: एनसीपी (एसपी) 22, कांग्रेस 20, बीजेपी 14
- अहिल्यानगर: एनसीपी 27, बीजेपी 25
कांग्रेस और अन्य दलों का प्रदर्शन
कांग्रेस को कुछ चुनिंदा शहरों में सफलता मिली है।
- लातूर में कांग्रेस ने 43 सीटें जीतकर बढ़त बनाई
- चंद्रपुर में कांग्रेस 26 सीटों के साथ आगे रही
- कोल्हापुर में कांग्रेस को 28 सीटें मिलीं
वंचित बहुजन आघाड़ी (VBA) ने सोलापुर, संभाजीनगर और अकोला में सीमित लेकिन प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई, जबकि मनसे का प्रदर्शन अधिकांश जगहों पर कमजोर रहा।
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इन नतीजों से साफ है कि शहरी महाराष्ट्र में बीजेपी और महायुति की पकड़ और मजबूत हुई है। बीएमसी में सत्ता परिवर्तन को सिर्फ स्थानीय राजनीति नहीं, बल्कि राज्य और राष्ट्रीय राजनीति के बड़े संकेत के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन नतीजों का असर आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों की रणनीतियों पर भी साफ तौर पर दिखाई देगा।









