दिल्ली के मयूर विहार इलाके के लिए शनिवार, 7 फरवरी, एक ऐतिहासिक और भावनात्मक दिन बन गया। लंबे समय से चली आ रही जन-मांग को स्वीकार करते हुए मयूर विहार पॉकेट-1 मेट्रो स्टेशन का नाम आधिकारिक रूप से बदलकर ‘श्री राम मंदिर मयूर विहार’ कर दिया गया है। इस फैसले को स्थानीय लोगों ने आस्था, सांस्कृतिक सम्मान और पहचान से जुड़ा बड़ा कदम बताया है।
नाम बदलने की मांग लंबे समय से थी
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों की ओर से मेट्रो स्टेशन का नाम बदलने की मांग काफी समय से की जा रही थी। लोगों का कहना था कि यह इलाका श्री राम मंदिर से जुड़ी गहरी धार्मिक आस्था रखता है और स्टेशन का नाम उसी भावनात्मक पहचान को दर्शाना चाहिए।
इसके अलावा, पॉकेट-1 और फेज-1 मेट्रो स्टेशनों के नामों में समानता के कारण यात्रियों को अक्सर भ्रम की स्थिति का सामना करना पड़ता था।
DMRC अधिकारियों ने दी पुष्टि
दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) के अधिकारियों ने पुष्टि करते हुए बताया कि स्टेशन के नाम को लेकर तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी कर ली गई हैं। अधिकारियों के अनुसार, यह बदलाव न सिर्फ यात्रियों की सुविधा के लिहाज से अहम है, बल्कि स्थानीय लोगों की आस्था और भावनाओं का भी सम्मान करता है।
सनातन धर्म सभा के प्रयास रंग लाए
इस नाम परिवर्तन के पीछे सनातन धर्म सभा (मयूर विहार संचालन समिति – श्री राम मंदिर, पॉकेट-1) के लगातार प्रयासों को अहम माना जा रहा है। समिति की ओर से लंबे समय से प्रशासन के समक्ष यह मांग रखी जा रही थी।
समिति ने कहा कि इस ऐतिहासिक निर्णय को साकार करने में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की संवेदनशील सोच और जनभावनाओं के प्रति उनकी समझ निर्णायक साबित हुई। मुख्यमंत्री के निर्देश पर DMRC ने इस प्रस्ताव पर तेजी से कार्रवाई की।
विधायक की भूमिका भी रही अहम
क्षेत्र के लोकप्रिय विधायक रविकांत उज्जैनवाल ने भी इस विषय को लेकर लगातार पैरवी की। स्थानीय लोगों का कहना है कि विधायक ने सनातन संस्कृति और क्षेत्रीय पहचान को मजबूती देने के लिए इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया।
स्थानीय लोगों ने जताया आभार
स्टेशन का नाम बदलने के फैसले के बाद मयूर विहार में खुशी का माहौल है। स्थानीय नागरिकों ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और विधायक रविकांत उज्जैनवाल का आभार जताते हुए कहा कि यह सिर्फ नाम परिवर्तन नहीं, बल्कि लोगों की आस्था और भावनाओं को मिला सम्मान है।
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लोगों का मानना है कि अब मयूर विहार की पहचान और भी सशक्त हुई है और यह इलाका सांस्कृतिक रूप से “राममय” हो गया है। यह बदलाव न सिर्फ प्रशासनिक निर्णय है, बल्कि मयूर विहार के सामाजिक और सांस्कृतिक इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ता है।









