संसद के मौजूदा बजट सत्र में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच टकराव लगातार तेज होता जा रहा है। इसी बीच विपक्ष ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए अविश्वास प्रस्ताव लाने के संकेत दिए हैं। लोकसभा में बार-बार हो रहे हंगामे की वजह से राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर सामान्य चर्चा नहीं हो सकी, जिसके चलते यह प्रस्ताव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन के बिना ही पारित कर दिया गया।
विपक्षी दलों की रणनीति पर मंथन
सूत्रों के अनुसार कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के साथ विपक्षी दलों के नेताओं की अहम बैठक हुई है। बैठक में यह फैसला लिया गया कि यदि विपक्ष को सदन में अपनी बात रखने से रोका गया, तो लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया जाएगा।
विपक्ष का आरोप है कि राहुल गांधी सांसदों के निलंबन और महिला सांसदों से जुड़े आरोपों जैसे मुद्दों पर बोलना चाहते थे, लेकिन उन्हें सदन में अनुमति नहीं दी गई।
हंगामे के चलते लोकसभा स्थगित
सोमवार, 9 फरवरी 2026 को सुबह लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। हालात को देखते हुए सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी।
अविश्वास प्रस्ताव की संवैधानिक प्रक्रिया
लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए कम से कम 100 सांसदों का समर्थन आवश्यक होता है। इसके अलावा प्रस्ताव लाने से पहले 14 दिन का नोटिस देना अनिवार्य है।
यदि प्रस्ताव स्वीकार किया जाता है, तो उस पर सदन में चर्चा होती है। चर्चा के दौरान संबंधित व्यक्ति सदन की कुर्सी पर उपस्थित नहीं रहता।
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पास होने की संभावना बेहद कम
यदि अविश्वास प्रस्ताव पारित हो जाता है, तो लोकसभा अध्यक्ष को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ता है। हालांकि मौजूदा राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए इसके पारित होने की संभावना बेहद कम मानी जा रही है, क्योंकि विपक्ष के पास आवश्यक बहुमत नहीं है।









