बांग्लादेश में जारी राजनीतिक अस्थिरता और अल्पसंख्यक समुदाय, विशेषकर हिंदुओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा को लेकर भारत सरकार ने चिंता जताई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को जारी बयान में कहा कि पड़ोसी देश में अल्पसंख्यकों को निशाना बनाए जाने की घटनाएं गंभीर और चिंताजनक हैं।
उन्होंने कहा कि दीपू दास की हत्या की भारत कड़ी निंदा करता है और उम्मीद करता है कि इस अपराध के जिम्मेदार लोगों को कानून के दायरे में लाया जाएगा। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि ऐसी घटनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
हिंसा की घटनाओं पर भारत की प्रतिक्रिया
विदेश मंत्रालय के अनुसार, बांग्लादेश की मौजूदा अंतरिम सरकार के कार्यकाल में करीब 2,900 घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें हत्या, आगजनी और संपत्ति से जुड़े अपराध शामिल हैं। मंत्रालय ने कहा कि इन घटनाओं को केवल राजनीतिक हिंसा बताकर टालना सही नहीं है और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा एक अहम मुद्दा बना हुआ है।
चुनावी माहौल और राजनीतिक हलचल
बांग्लादेश में फरवरी 2025 में प्रस्तावित आम चुनावों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) चुनावी तैयारियों में जुटी है। इसी क्रम में पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान हाल ही में ढाका लौटे हैं। उनकी वापसी को बांग्लादेश की राजनीति में एक अहम घटनाक्रम के तौर पर देखा जा रहा है।
बांग्लादेश चुनावों पर भारत का रुख
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने चुनावों को लेकर भारत का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि भारत बांग्लादेश में स्वतंत्र, निष्पक्ष और समावेशी चुनावों का समर्थन करता है। उन्होंने कहा कि भारत बांग्लादेश के नागरिकों के साथ अच्छे संबंध बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है और वहां शांति, स्थिरता व लोकतांत्रिक प्रक्रिया के मजबूत होने की उम्मीद करता है।
अल्पसंख्यकों पर हमलों से बढ़ी चिंता
हाल के दिनों में बांग्लादेश में कुछ हिंसक घटनाओं के बाद अल्पसंख्यक समुदाय को लेकर चिंता और बढ़ गई है। दीपू दास और अमृत मंडल नामक युवकों की हत्या की खबरों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतिक्रियाएं पैदा की हैं। इन घटनाओं के विरोध में भारत समेत अन्य देशों में भी प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं।
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भारत सरकार ने बांग्लादेश की स्थिति पर करीबी नजर बनाए रखने की बात कही है और वहां अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया है।









