ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की सुरक्षा और कानूनी जागरूकता को मजबूत बनाने के उद्देश्य से पंचायती राज मंत्रालय ने ‘निर्भय रहो’ पहल के तहत तीन दिवसीय ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स (ToT) कार्यक्रम का आयोजन किया। यह कार्यक्रम 25 से 27 मई 2026 तक नई दिल्ली में आयोजित किया गया, जिसमें देशभर से पंचायत और ग्रामीण विकास संस्थानों से जुड़े प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
इस पहल का उद्देश्य निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों और पंचायत सदस्यों को महिलाओं की सुरक्षा, कानूनी अधिकारों, लैंगिक समानता और सामुदायिक सहायता तंत्र के बारे में प्रशिक्षित करना है, ताकि ग्रामीण स्तर पर महिलाओं के खिलाफ हिंसा रोकने और पीड़ितों को सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था मजबूत की जा सके।
‘निर्भय रहो’ पहल क्या है?
यह कार्यक्रम पंचायती राज मंत्रालय द्वारा महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU), बेंगलुरु के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसे निर्भय फंड के माध्यम से लागू किया जा रहा है।
केंद्र सरकार का कहना है कि इस पहल के जरिए पंचायतों को महिलाओं की सुरक्षा और संवेदनशील शासन व्यवस्था के लिए अधिक सक्षम बनाया जाएगा।
करीब 50 प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा
नई दिल्ली में आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में लगभग 50 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इनमें राज्य ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थानों (SIRD&PR), राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान (NIRDPR), पीरामल फाउंडेशन और ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया फाउंडेशन के प्रतिनिधि शामिल रहे।
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र को पंचायती राज मंत्रालय के सचिव विवेक भारद्वाज और भारतीय लोक प्रशासन संस्थान (IIPA) के महानिदेशक डॉ. सुरेंद्र कुमार बागड़े ने संबोधित किया।
पंचायतों की भूमिका पर जोर
अपने संबोधन में पंचायती राज मंत्रालय के सचिव विवेक भारद्वाज ने कहा कि पंचायतें महिलाओं की सुरक्षा और न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। उन्होंने कहा कि जागरूक और संवेदनशील पंचायत नेतृत्व ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा से जुड़े मामलों के समाधान में प्रभावी साबित हो सकता है।
उन्होंने बताया कि ‘निर्भय रहो’ अभियान के तहत तीन प्रमुख पहलें शुरू की गई हैं—
1. निर्भय नेत्री
यह पहल निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों के प्रशिक्षण और कानूनी जागरूकता पर केंद्रित है।
2. निर्भय चेतना
इसका उद्देश्य निर्वाचित पुरुष प्रतिनिधियों को महिलाओं से जुड़े मुद्दों और लैंगिक समानता के प्रति संवेदनशील बनाना है।
3. निर्भय दृष्टि
इस पहल के तहत पंचायत स्तर पर तकनीक आधारित सुरक्षा ढांचा विकसित किया जाएगा, जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों के प्रमुख स्थानों पर CCTV कैमरे लगाने की योजना शामिल है।
32 लाख से अधिक प्रतिनिधियों तक पहुंचने का लक्ष्य
मंत्रालय के अनुसार, इस अभियान के जरिए देशभर में करीब 14.5 लाख निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों और लगभग 17.5 लाख पुरुष पंचायत प्रतिनिधियों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है।
प्रशिक्षण में इन विषयों पर हुई चर्चा
तीन दिवसीय कार्यक्रम के दौरान कई महत्वपूर्ण विषयों पर सत्र आयोजित किए गए, जिनमें शामिल हैं—
- महिलाओं के खिलाफ हिंसा
- घरेलू हिंसा कानून
- बाल विवाह रोकथाम
- साइबर सुरक्षा
- पीड़ित सहायता प्रणाली
- कानूनी उपचार और मुआवजा
- पंचायत स्तर पर फर्स्ट रिस्पॉन्स सिस्टम
- सामुदायिक भागीदारी और जागरूकता
कार्यक्रम में विशेषज्ञ व्याख्यान, केस स्टडी, समूह चर्चा, मूट कोर्ट अभ्यास और रोल-प्ले जैसी गतिविधियों के जरिए प्रतिभागियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
ग्रामीण भारत में महिला सुरक्षा पर फोकस
NLSIU बेंगलुरु के प्रोफेसर डॉ. साईंराम भट ने कहा कि पंचायत प्रतिनिधि ग्रामीण क्षेत्रों में कानूनी जागरूकता बढ़ाने और महिलाओं को न्याय दिलाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने जमीनी स्तर पर संवेदनशील और पीड़ित-केंद्रित व्यवस्था विकसित करने की जरूरत पर जोर दिया।
कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों की प्रतिक्रियाएं ली गईं और इस मॉडल को देशभर के राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों तक चरणबद्ध तरीके से विस्तार देने पर चर्चा की गई।
यह भी पढ़ें: Norway Chess 2026: आर प्रग्गनानंदा ने फिर चौंकाया, मैग्नस कार्लसन को क्लासिकल मुकाबले में दी करारी मात
ग्रामीण महिलाओं की सुरक्षा के लिए बड़ा कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि ‘निर्भय रहो’ जैसी पहलें पंचायतों को अधिक जवाबदेह और महिला-अनुकूल बनाने की दिशा में अहम साबित हो सकती हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की सुरक्षा, कानूनी सहायता और सामाजिक समर्थन तंत्र को मजबूती मिलने की उम्मीद है।









