MobiKwik fraud: आज की हाई तकनीक दुनिया में डिजिटलीकरण आम हो गया है। लेकिन कभी-कभी इसके नुकसान भी देखने को मिलते हैं। एक ऐसा ही मामला सामने आया है मोबिक्विक (MobiKwik) से फ्रॉड का।
खबर है कि, डिजिटल वॉलेट कंपनी मोबिक्विक (MobiKwik) के सिस्टम में आई कथित गड़बड़ी का फायदा उठाकर 11 और 12 सितंबर को करीब 40 करोड़ रुपये कंपनी के खाते से यूपीआई ट्रांजैक्शन्स के जरिए उड़ा लिए गए।
यह धोखाधड़ी तब सामने आई जब पुलिस ने छह लोगों को गिरफ्तार किया, जिनके खातों में इस चोरी किए गए पैसे में से 9 लाख रुपये पाए गए। हैरानी की बात यह है कि यह दूसरी बार हुआ है जब मोबिक्विक को इस तरह से चूना लगाया गया है। अक्टूबर 2017 में भी कंपनी के साथ ऐसा ही धोखाधड़ी का मामला सामने आया था, जिसमें करीब 19 करोड़ रुपये हजारों व्यक्तिगत बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए गए थे।
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गलत पिन पर भी हो रहे थे ट्रांजैक्शन्स
इस बार, जांचकर्ताओं के मुताबिक, गड़बड़ी कंपनी के सॉफ्टवेयर को अपडेट करने के बाद सामने आई। इस खामी की वजह से मोबिक्विक यूज़र्स अपने वॉलेट बैलेंस से कहीं ज्यादा रकम भेज पा रहे थे। इतना ही नहीं, अगर यूज़र्स गलत पिन (PIN) भी डालते थे तो भी लेनदेन सफल हो रहा था।
पुलिस ने कहा कि यह स्कैमस्टर्स को इस गड़बड़ी की जानकारी कैसे मिली, इसकी जांच की जा रही है। अधिकारियों को शक है कि इसमें कंपनी के अंदरूनी लोगों की भी संलिप्तता हो सकती है। यह धोखाधड़ी 13 सितंबर को एक मोबिक्विक कर्मचारी द्वारा रिपोर्ट की गई, जिसने 11 और 12 सितंबर को संदिग्ध लेनदेन का पता लगाने वाली ऑडिट रिपोर्ट का हवाला दिया।
पुलिस के अनुसार, केवल दो दिनों में ही धोखाधड़ी वाले ट्रांजैक्शन्स की कुल राशि 40.2 करोड़ रुपये रही। 11-12 सितंबर को करीब 5 लाख लेनदेन हुए और अब तक 2,500 बैंक खातों की पहचान की गई है। इनमें से 8 करोड़ रुपये को फ्रीज किया गया है। यह रकम इन्हीं बैंक खातों में जमा की गई थी।
गिरफ्तार पांच आरोपी नूंह के रहने वाले हैं और एक पलवल का है। आरोपियों की पहचान रेहान, वकार यूनुस, वसीम अकरम, मोहम्मद आमिर, मोहम्मद अंसार और मोहम्मद सकील के रूप में हुई है। सभी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस प्रवक्ता अशोक कुमार ने कहा कि अगर किसी कंपनी कर्मचारी की संलिप्तता पाई जाती है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
नूंह पुलिस ने क्या बताया
नूंह पुलिस ने मंगलवार को लोगों से अपील की कि वे 23 सितंबर तक अपने बैंक खातों में आई किसी भी अस्पष्ट/अनधिकृत कैश ट्रांसफर की सूचना दें। पुलिस ने बयान में कहा, “अगर किसी को मोबिक्विक ऐप के जरिए 11 और 12 सितंबर को तकनीकी सुरक्षा चूक या अन्य कारणों से लेनदेन प्राप्त हुए हैं या किसी ने अनधिकृत भुगतान प्राप्त किया है और वे उन्हें लौटाना चाहते हैं या इस संबंध में कोई शिकायत है, तो वे एसपी कार्यालय आ सकते हैं। पलवल जिले और अन्य मेवात क्षेत्रों के लोग भी आ सकते हैं।”
आरोपियों पर भादस संहिता (BNS) की धारा 318(4) (धोखाधड़ी) और 314 (अमानत में खयानत) के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस बैंक के साथ मिलकर पैसे वापस लाने और उन अन्य लोगों की पहचान करने की कोशिश कर रही है जिन्हें इस धोखाधड़ी का फायदा हुआ।
कंपनी ने भी बयान जारी किया, ‘कंपनी इस राशि को वापस लाने के लिए हरसंभव और जरूरी प्रयास कर रही है। लेकिन चूंकि पुलिस जांच और रिकवरी अभी शुरू ही हुई है, इसलिए इसका सटीक प्रभाव बताना संभव नहीं है। प्रारंभिक डेटा के आधार पर, एक जोखिम कम करने के उपाय के रूप में 40 करोड़ रुपये की एफआईआर दर्ज कराई गई, जिसमें से कंपनी ने लगभग 14 करोड़ रुपये वापस पा लिए हैं। इस प्रकार अनुमानित शुद्ध प्रभाव 26 करोड़ रुपये है। कंपनी कानूनी कार्रवाई और आक्रामक वसूली के जरिए पूरे पैसे को समय के साथ वापस लाने की कोशिश कर रही है।’








