दूध को हमेशा से ही स्वास्थ्यवर्धक आहार माना गया है, लेकिन हाल ही में सोशल मीडिया पर इसके लाभ और हानिकारक प्रभाव को लेकर बहस तेज हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि दूध का असर व्यक्ति की सेहत, उसकी सहनशीलता और पूरी डाइट पर निर्भर करता है।
दूध के स्वास्थ्य लाभ
एक बड़े शोध अध्ययन (10 लाख से अधिक प्रतिभागियों पर आधारित) के अनुसार, नियमित और संतुलित मात्रा में दूध पीने से कई बीमारियों का खतरा कम किया जा सकता है।
दिल और हड्डियों के लिए फायदेमंद:
दूध में मौजूद प्रोटीन, कैल्शियम, पोटैशियम, विटामिन B12, फॉस्फोरस और आयोडीन हड्डियों को मजबूत बनाते हैं। विटामिन D के साथ मिलकर यह फ्रैक्चर के जोखिम को कम करता है। दूध का प्रोटीन मांसपेशियों की रिकवरी में मदद करता है और भूख को नियंत्रित करने में भी सहायक है।
टाइप-2 डायबिटीज और हाई बीपी पर असर:
संतुलित मात्रा में दूध का सेवन टाइप-2 डायबिटीज और हृदय रोगों के खतरे को कम कर सकता है।
सावधानियाँ और संभावित दुष्प्रभाव
- स्किम्ड मिल्क कुछ लोगों में पिंपल या एक्ने बढ़ा सकता है।
- पुरुषों में अधिक दूध का सेवन प्रोस्टेट कैंसर का जोखिम थोड़ा बढ़ा सकता है, जबकि कोलोरेक्टल कैंसर का खतरा कम हो सकता है।
- लैक्टोज असहिष्णुता वाले लोग दूध पीने पर गैस, पेट दर्द और ब्लोटिंग जैसी समस्याओं का सामना कर सकते हैं। ऐसे लोगों के लिए लैक्टोज-फ्री दूध, फोर्टिफाइड प्लांट मिल्क या सोया मिल्क बेहतर विकल्प हैं।
मिथक और हकीकत
कई लोगों का मानना है कि दूध में हार्मोन या एंटीबायोटिक का इस्तेमाल होता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि अधिकतर देशों में इसके उपयोग पर कड़ी निगरानी रहती है। दूध के फैट विकल्प फुल-फैट या लो-फैट, दोनों ही सही हो सकते हैं, यह पूरी तरह आपकी स्वास्थ्य जरूरत और डाइट गोल पर निर्भर करता है।
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बच्चों, बुजुर्गों और अधिकांश सामान्य लोगों के लिए दूध एक आसान और प्रभावी पोषण स्रोत है। हालांकि, अगर किसी को सहनशीलता की समस्या, एक्ने की समस्या या किसी विशेष डाइट का पालन है, तो दूध के विकल्प चुनना भी बिल्कुल ठीक है।









