संघ को किसी विचारधारा में बांधा नहीं जा सकता- मोहन भागवत


'द आरएसएस रोडमैप्‍स 21 सेंचुरी' किताब के विमोचन के मौके पर मोहन भागवत ने कहा कि हिंदुत्व से समझौता नहीं किया जा सकता..

संघ को किसी विचारधारा में बांधा नहीं जा सकता- मोहन भागवत


 

 

150वीं गांधी जयंती के अवसर पर बीते मंगलवार अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्‍ट्रीय संगठन मंत्री सुनील आंबेकर की पुस्तक 'द आरएसएस रोडमैप्‍स 21 सेंचुरी' का विमोचन किया गया। पुस्तक का विमोचन संघ प्रमुख मोहन भागवत द्वारा किया गया। इस मौके पर कई माननीय अतीथी मौजूद रहे। इस दौरान किताब के लेखक सुनील अंबेकर जी ने बताया कि पुस्तक  राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ के काम करने के तौर-तरीकों को लेकर लिखी गई है। उन्होनें बताया कि ये किताब लोगों में संघ और हिंदुत्व के प्रति एक भूमिका रखने का काम करेगी। उन्होनें कहा कि कुछ लोग संघ को लेकर गलत धारणा फैलाते रहते हैं, लेकिन आरएसएस समाज के बीच चुपचाप अपना काम करती है। ऐसे ही कुछ पहलुओं को इस किताब के ज़रिए समेटकर लोगों के सामने आरएसएस की भूमिका को उजागर करना है।

 

एबीवीपी के प्रमुख सुनील अम्बेकर की किताब के विमोचन के मौके पर संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि संघ को किसी भी विचारधारा में नहीं बांधा जा सकता है। संघ किसी भी विचार में विश्वास नहीं करता है। संघ का मुख्य मूल्य है कि भारत एक हिंदू राष्ट्र है और इससे कोई भी समझौता नहीं किया जा सकता। मोहन भागवत ने कहा संघ को किसी विचारधारा से बांधा नहीं जा सकता। संघ के संस्थापक डॉ. हेडगेवार ने कभी नहीं कहा कि वे संघ को पूरी तरह से समझ सकते हैं। काफी समय तक सरसंघचालक होने के बावजूद गुरु जी ने कहा कि मैं शायद संघ को समझने लगा हूं।

 

उन्होंने कहा कि  सुनील अंबेकर जी किताब  एक सराहनीय कदम है। लोगों को इस तरह की किताबे लिखने की प्रेरणा मिले मेरी भविष्य में ऐसी कामना है। मोहन भागवत ने कहा कि आरएसएस के लिए समाजिक विकास सबसे पहले है। इस किताब में बताया गया है कि आरएसएस समाज में कैसे अपना काम करती है। दरअसल इस किताब में बताया गया है कि संस्थापक डॉ. केशव राव बलीराम हेडगेवार के मन में संघ की स्थापना का विचार कैसे आया। ये किताब कई विषयों को लेकर समाज में काम करता है।

 

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