Jagdeep Dhankhar’s resignation: मानसून सत्र के पहले ही दिन उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे ने देश की सियासत में खलबली मचा दी है। उनके अचानक दिए गए इस्तीफे पर विभिन्न राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार और भाजपा पर सीधा हमला करते हुए पीएमओ और भाजपा नेताओं की चुप्पी को संदेहास्पद करार दिया है। उनका कहना है कि इस चुप्पी से यह संकेत मिलता है कि परदे के पीछे कोई बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम चल रहा है।
विपक्ष ने जताई आशंका
धनखड़ के इस्तीफे को लेकर न सिर्फ कांग्रेस, बल्कि शिवसेना (उद्धव गुट) और तृणमूल कांग्रेस जैसे अन्य विपक्षी दलों ने भी सवाल उठाए हैं। कई नेताओं का कहना है कि उपराष्ट्रपति जैसे संवैधानिक पद से अचानक इस्तीफा देना सामान्य बात नहीं हो सकती। उन्होंने इसे सिर्फ ‘स्वास्थ्य कारणों’ से जोड़कर देखने से इनकार किया है।
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पवन खेड़ा का तंज
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, ‘देश के उपराष्ट्रपति ने स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दिया, लेकिन प्रधानमंत्री कार्यालय और भाजपा के किसी नेता ने न तो उनके स्वास्थ्य की कामना की और न ही उनके कार्यकाल के लिए धन्यवाद दिया। यह चुप्पी इशारा करती है कि पर्दे के पीछे कुछ बड़ा खेल चल रहा है और भाजपा भीतरूनी दबाव में है।’
भाजपा की चुप्पी बनी सवाल
गौरतलब है कि धनखड़ ने सोमवार को राष्ट्रपति को इस्तीफा सौंपा, जिसमें उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया था। हालांकि पीएम मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और भाजपा के किसी भी वरिष्ठ नेता की ओर से तुरंत कोई सार्वजनिक बयान नहीं आया। न उन्हें शुभकामनाएं दी गईं, न ही उनके योगदान की सराहना की गई।
क्या है इस्तीफे के पीछे की रणनीति?
राजनीतिक गलियारों में कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या धनखड़ को किसी नई जिम्मेदारी के लिए हटाया गया है या फिर यह भाजपा की अंदरूनी रणनीति का हिस्सा है।
पीएम मोदी की पहली प्रतिक्रिया
उपराष्ट्रपति के इस्तीफे के 14 घंटे बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहली प्रतिक्रिया सामने आई। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘श्री जगदीप धनखड़ जी को भारत सहित कई क्षेत्रों में देश की सेवा करने का सौभाग्य मिला है। मैं उनके उत्तम स्वास्थ्य की कामना करता हूं।’








