देश के उपराष्ट्रपति पद से जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफे ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। भले ही उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अपना इस्तीफा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सौंपा हो, लेकिन विपक्ष का दावा है कि इसके पीछे की वजह कुछ और है।
कांग्रेस ने लगाए गंभीर आरोप
कांग्रेस समेत विपक्षी दलों का कहना है कि उपराष्ट्रपति धनखड़ का इस्तीफा केवल एक “औपचारिक कारण” पर आधारित नहीं है, बल्कि इसके पीछे गंभीर राजनीतिक मतभेद और दबाव काम कर रहे हैं। कांग्रेस प्रवक्ताओं ने कहा कि जस्टिस वर्मा को हटाने से संबंधित विपक्ष के प्रस्ताव को स्वीकार कर धनखड़ ने जिस तरह से कार्यवाही को आगे बढ़ाया, उसने सत्ता पक्ष को नाराज़ कर दिया।
फोन कॉल बना विवाद की जड़?
एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के अनुसार, उपराष्ट्रपति धनखड़ को हाल ही में केंद्र सरकार की ओर से एक महत्वपूर्ण कॉल आया था। उस कॉल के बाद ही चीजें तेजी से बदलीं। बताया जा रहा है कि इस कॉल में उन्हें विपक्ष के नोटिस पर कार्रवाई को लेकर सवालों का सामना करना पड़ा। सूत्रों के मुताबिक, बातचीत तीखी बहस में बदल गई, जिससे दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ गया।
अविश्वास प्रस्ताव की चर्चा ने बदला माहौल
सूत्रों का कहना है कि केंद्र सरकार की नाराजगी के बाद धनखड़ के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की चर्चा भी शुरू हो गई थी। जब इस बात की भनक उपराष्ट्रपति को लगी, तो उन्होंने इससे पहले ही पद से इस्तीफा देना उचित समझा।

विपक्ष ने जताई संवैधानिक प्रक्रिया पर चिंता
विपक्षी नेताओं ने इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को दबाव में आकर पद छोड़ना पड़े, तो यह लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी है। उन्होंने राष्ट्रपति से पूरे मामले की जांच की मांग की है।
सरकार की ओर से चुप्पी
अब तक केंद्र सरकार या सत्तारूढ़ दल की ओर से इस विषय में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में संसद के भीतर और बाहर इस मुद्दे पर तेज बहस देखने को मिलेगी।
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उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का इस्तीफा सिर्फ एक औपचारिक निर्णय नहीं, बल्कि इससे जुड़ी राजनीतिक परतें अब सामने आ रही हैं। विपक्ष इस मुद्दे को लोकतंत्र और संवैधानिक गरिमा से जोड़ रहा है, जबकि सत्ता पक्ष की चुप्पी संदेहों को और गहरा कर रही है। आगामी दिनों में संसद का मानसून सत्र इस घटनाक्रम का राजनीतिक अखाड़ा बन सकता है।









