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Home नई तकनीकी

एक बार ChatGPT यूज करने से बर्बाद होता है आधा लीटर पानी, भविष्य के लिए खतरनाक: रिपोर्ट

ChatGPT: जनरेटिव एआई आज उतनी ही बिजली खपत कर रहा है जितना कोई छोटा देश करता है, और एक साल के भीतर जापान

Kiran rautela by Kiran rautela
22 July 2025
in नई तकनीकी, ब्रेकिंग न्यूज़, भारत
0
एक बार ChatGPT यूज करने से बर्बाद होता है आधा लीटर पानी, भविष्य के लिए खतरनाक: रिपोर्ट

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ChatGPT: अगर आप भी एआई ओपनचैट का इस्तेमाल करते हैं तो आपको सावधान रहने की जरूरत है क्योंकि ये पर्यावरण के लिए खतरनाक साबित हो रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार, ओपनएआई, मेटा और गूगल जैसी टेक दिग्गज कंपनियों से अपील की जा रही है कि वे जनरेटिव एआई से जुड़ी एक गंभीर समस्या, इसकी बढ़ती ऊर्जा खपत को लेकर ज़िम्मेदारी लें और समाधान की दिशा में कदम उठाएं।

रिपोर्ट्स के अनुसार, जनरेटिव एआई आज उतनी ही बिजली खपत कर रहा है जितना कोई छोटा देश करता है, और एक साल के भीतर जापान जितनी ऊर्जा की मांग कर सकता है। एक सामान्य वेब सर्च की तुलना में AI आधारित सर्च 10 गुना अधिक ऊर्जा का उपयोग करता है, और इस तकनीक ने पिछले दो वर्षों में पूरे टेक सेक्टर की ऊर्जा खपत को तीन गुना कर दिया है।

Using ChatGPT once wastes half a liter of water, dangerous for the future: Report
Using ChatGPT once wastes half a liter of water, dangerous for the future: Report

यह भी पढ़ें- दो रंगों के साथ डिजाइन हुआ था हमारा तिरंगा, कैसे हुआ बदलाव और किसने बनाया?

ऑस्ट्रेलियन एआई विशेषज्ञ प्रोफेसर केट क्रॉफर्ड ने हाल ही में विक्टोरिया की स्टेट लाइब्रेरी में जनरेटिव एआई के पर्यावरणीय, राजनीतिक और सामाजिक प्रभावों पर दिए गए एक व्याख्यान से पहले यह चेतावनी दी। टाइम मैगज़ीन द्वारा एआई के क्षेत्र में दुनिया के 100 सबसे प्रभावशाली लोगों में नामित क्रॉफर्ड का कहना है कि यह तकनीक हमारे ग्रह को ऐसे तरीकों से बदल रही है जो अक्सर छिपे होते हैं और स्थायी होते हैं।

क्रॉफर्ड ने कहा, ‘हम पर यह जबरदस्त दबाव है कि हम कार्बन उत्सर्जन को कम करें, नहीं तो इसके दुष्परिणाम हम सभी को भुगतने होंगे। जलवायु परिवर्तन से आप भाग नहीं सकते, और इसलिए यह मुद्दा उन टेक अरबपतियों के लिए भी गंभीर है। अब हमारे पास इतना समय नहीं है कि हम ऐसे सिस्टम बनाएं जो किसी औद्योगिक देश जितनी ऊर्जा और कार्बन उत्सर्जन कर रहे हों।’

How much water does AI consume
How much water does AI consume

पानी की भी बर्बादी

केवल ऊर्जा नहीं, पानी की खपत भी चिंता का विषय बन गई है। क्रॉफर्ड ने कहा कि एआई डेटा सेंटरों को ठंडा करने के लिए बड़ी मात्रा में ताजे पानी की जरूरत होती है, जो अक्सर भाप बनकर उड़ जाता है। उन्होंने बताया कि, ‘चैटजीपीटी से की गई हर बातचीत औसतन आधा लीटर पानी बर्बाद करती है।’

क्रॉफर्ड ने कहा, ‘व्यक्तिगत रूप से मुझे लगता है कि एआई सेक्टर की नंबर-1 प्राथमिकता टिकाऊपन (sustainability) होनी चाहिए, ना कि एआई रेस।’

ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने भी इस साल की शुरुआत में कहा था कि भविष्य की एआई के लिए किसी ऊर्जा में क्रांतिकारी खोज की जरूरत होगी। उन्होंने खुद न्यूक्लियर फ्यूजन स्टार्टअप हेलियन एनर्जी में निवेश किया है, जो माइक्रोसॉफ्ट को ऊर्जा सप्लाई करेगा।

क्रॉफर्ड का मानना है कि न्यूक्लियर एनर्जी एक त्वरित समाधान है लेकिन असल मुद्दे को नहीं सुलझाता।

समाधान क्या हो सकता है?

क्रॉफर्ड के अनुसार इस संकट से निपटने के दो अहम रास्ते हैं,

  • कम ऊर्जा खपत वाले एआई सिस्टम डिज़ाइन किए जाएं जो रीसायकल पानी और नवीकरणीय ऊर्जा पर आधारित हों।
  • टेक कंपनियां किसी एआई मॉडल की क्षमता और मार्केटिंग जितना ही महत्व उसकी टिकाऊ प्रकृति को दें।

ऑस्ट्रेलिया की भूमिका

क्रॉफर्ड मानती हैं कि ऑस्ट्रेलिया इस दिशा में वैश्विक उदाहरण बन सकता है क्योंकि यह देश पहले से ही जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से जूझ रहा है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हम ऐसी टेक्नोलॉजी ना बनाएं जो हमारे ग्रह के लिए भारी पड़ जाए। अब बदलाव का समय है।

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