सरकार के मुताबिक, माध्यमिक शिक्षा विभाग के तहत करीब 48,062 कर्मचारियों और बेसिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत लगभग 1,22,304 कार्मिकों को इस सुविधा का लाभ मिल सकता है। इस प्रकार दोनों विभागों को मिलाकर करीब 1.70 लाख शिक्षणेत्तर कर्मचारी इस निर्णय से लाभान्वित हो सकते हैं। उनके आश्रित परिवार के सदस्यों को भी योजना के तहत चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का प्रावधान है।
माध्यमिक शिक्षा विभाग के 48 हजार से अधिक कर्मचारियों को लाभ
वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना के अनुसार, माध्यमिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत विभिन्न प्रकार के विद्यालयों में कार्यरत शिक्षणेत्तर कर्मचारियों और उनके आश्रितों को कैशलेस इलाज की सुविधा दी जाएगी।
इसमें अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों, वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों, अशासकीय सहायता प्राप्त संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों, संस्कृत महाविद्यालयों और वित्तविहीन संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों के कर्मचारी शामिल हैं।
सरकार का अनुमान है कि इस व्यवस्था से लगभग 48,062 कार्मिकों को लाभ मिलेगा। योजना के लिए प्रति कर्मचारी सालाना 3,000 रुपये का प्रीमियम निर्धारित किया गया है। इसके आधार पर माध्यमिक शिक्षा विभाग पर करीब 14.42 करोड़ रुपये का वार्षिक वित्तीय भार आने का अनुमान है।
बेसिक शिक्षा विभाग के 1.22 लाख से ज्यादा कर्मचारियों को राहत
कैबिनेट के फैसले में बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को भी शामिल किया गया है। इसके तहत बेसिक शिक्षा परिषद, अशासकीय सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों, वित्तविहीन विद्यालयों और समग्र शिक्षा परियोजना के अंतर्गत कार्यरत कार्मिकों तथा उनके आश्रित परिवार के सदस्यों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा प्रदान की जाएगी।
इस योजना से लगभग 1,22,304 कर्मचारियों को लाभ मिलने का अनुमान है। सरकार ने इनके लिए भी प्रति कार्मिक 3,000 रुपये वार्षिक प्रीमियम की दर तय की है। इस पर सालाना करीब 36.69 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
इस तरह माध्यमिक और बेसिक शिक्षा विभाग की दोनों योजनाओं पर कुल अनुमानित वार्षिक वित्तीय भार करीब 51.11 करोड़ रुपये होगा। इससे बड़ी संख्या में शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को इलाज के खर्च से राहत मिलने की संभावना है।
सरकारी और संबद्ध निजी अस्पतालों में होगा कैशलेस उपचार
इस योजना के तहत पात्र कर्मचारियों और उनके आश्रित परिवार के सदस्यों को सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ योजना से जुड़े निजी अस्पतालों में भी इलाज की सुविधा मिलेगी। यह सुविधा अंतःरोगी विभाग यानी आईपीडी में भर्ती होकर उपचार कराने के लिए उपलब्ध होगी।
बेसिक शिक्षा विभाग की योजना को लागू करने के लिए स्टेट एजेंसी फॉर कॉम्प्रिहेंसिव हेल्थ एंड इंटीग्रेटेड सर्विसेज (साचीज) की मदद लेने का प्रस्ताव है। उपचार की दरें प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत जन आरोग्य योजना और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) की ओर से समय-समय पर निर्धारित दरों के अनुरूप होंगी।
इस व्यवस्था से पात्र कर्मचारियों को अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति में इलाज के खर्च को लेकर आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, सुविधा का लाभ लेने के लिए पात्रता, अस्पतालों की सूची और अन्य प्रक्रियाओं से संबंधित विस्तृत दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा।
शिक्षक दिवस पर हुई घोषणा के बाद शिक्षणेत्तर कर्मचारियों तक बढ़ा दायरा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 5 सितंबर 2025 को शिक्षक दिवस के अवसर पर बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने की घोषणा की थी। अब सरकार ने इस सुविधा का दायरा बढ़ाते हुए शिक्षणेत्तर कर्मचारियों और उनके आश्रित परिवारों को भी इसमें शामिल करने का निर्णय लिया है।
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इस फैसले को शिक्षा विभाग से जुड़े कर्मचारियों की सामाजिक और स्वास्थ्य सुरक्षा मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। कैशलेस उपचार की सुविधा मिलने से पात्र कर्मचारियों को बीमारी या अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति में इलाज के खर्च का आर्थिक दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।









