लोकसभा में लगातार जारी गतिरोध के बीच राजनीतिक टकराव और तेज हो गया है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने बड़ा कदम उठाते हुए लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया है। यह नोटिस लोकसभा के महासचिव को सौंपा गया है, जिसे 114 सांसदों का समर्थन हासिल है।
कांग्रेस का आक्रामक रुख
कांग्रेस ने स्पीकर पर सदन को निष्पक्ष तरीके से संचालित न करने का आरोप लगाते हुए अविश्वास प्रस्ताव लाने का फैसला किया है। पार्टी का कहना है कि लोकसभा की कार्यवाही के दौरान विपक्ष की आवाज को लगातार दबाया जा रहा है, जिसके चलते यह कदम उठाना जरूरी हो गया था। नोटिस सौंपे जाने के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।
स्पीकर ने खुद को कार्यवाही से किया अलग
अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस मिलने के बाद स्पीकर ओम बिरला ने खुद को सदन की कार्यवाही के संचालन से अलग कर लिया। मंगलवार को वह लोकसभा की कार्यवाही के दौरान आसन पर नहीं बैठे, जिसे इस पूरे घटनाक्रम का अहम संकेत माना जा रहा है।
गतिरोध खत्म करने की कोशिशें जारी
इससे पहले संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में चल रहे गतिरोध को खत्म करने के लिए सभी दलों के फ्लोर लीडर्स के साथ बैठक की थी। सूत्रों के मुताबिक, विपक्षी दलों ने अपने आठ निलंबित सांसदों का निलंबन वापस लेने की शर्त पर सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने की सहमति जताई है।
बार-बार स्थगित हुई कार्यवाही
मंगलवार को भी लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष के जोरदार हंगामे के चलते सदन को पहले दोपहर 12 बजे तक और फिर दो बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा। लगातार हो रहे व्यवधानों के कारण अहम विधायी कामकाज प्रभावित हो रहा है।
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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस राजनीतिक रूप से असाधारण कदम माना जा रहा है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सदन में इस प्रस्ताव पर आगे क्या प्रक्रिया अपनाई जाती है और क्या सरकार व विपक्ष के बीच कोई सहमति बन पाती है। फिलहाल संसद का गतिरोध खत्म होने के आसार अभी भी अनिश्चित बने हुए हैं।









