जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख मौलाना महमूद मदनी के हालिया ‘जिहाद’ संबंधी बयान पर राजनीतिक बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। सोमवार को मेरठ में बीजेपी नेता और पूर्व विधायक संगीत सोम ने इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “जिहाद का समर्थन करने वालों को सनातनी मारते-मारते पाकिस्तान तक पहुंचा देंगे।”
मदरसों को बंद करने की मांग, मदनी पर सीधा हमला
पत्रकारों से बातचीत के दौरान संगीत सोम ने मौलाना मदनी को “बीमार कौम का बीमार मौलाना” बताया और आरोप लगाया कि मदनी जिन संस्थानों से जुड़े हैं, वहां से “आतंकवाद की सोच” पैदा होती है।
सोम ने कहा, “मदरसों से सिर्फ आतंकी निकलते हैं, इसलिए देश में सभी मदरसों को बंद कर देना चाहिए।” उन्होंने आगे कहा कि लव जिहाद, थूक जिहाद, वोट जिहाद—सब आतंकवाद के ही रूप हैं। एक व्यक्ति के “5–5 वोट” डालने के आरोप को उन्होंने “वोट जिहाद” करार दिया।
दिल्ली में हालिया बम धमाके पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने फिर दोहराया कि “आतंकी गतिविधियों की जड़ें मदरसों से जुड़ी होती हैं।”

मदनी ने भोपाल में क्या कहा था?
विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब भोपाल में आयोजित जमीयत की वार्षिक कॉन्फ्रेंस के दौरान मौलाना महमूद मदनी ने हाल की घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट और अन्य संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा था कि “जुल्म के खिलाफ जिहाद जारी रहेगा।”
उनके इस कथन को लेकर बीजेपी और कई हिंदू संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताई थी। बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने भी मदनी के बयान को “चिंताजनक” करार दिया था और जिहाद की अवधारणा पर सवाल उठाए थे।
संगीत सोम के खिलाफ अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं
संगीत सोम के तीखे बयान पर न तो मदनी की तरफ से और न ही विपक्षी दलों की ओर से अभी तक कोई प्रतिक्रिया सामने आई है। हालांकि, बीजेपी और हिंदू संगठनों के कई नेता पहले ही मदनी के “जिहाद” वाले बयान को भड़काऊ एवं तनाव बढ़ाने वाला करार दे चुके हैं।
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मामले ने पकड़ा नया मोड़
मदनी के बयान को लेकर शुरू हुआ विवाद अब संगीत सोम की टिप्पणी के बाद नए सियासी मोड़ पर पहुंच गया है। देखना होगा कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों और धार्मिक संगठनों का रुख क्या रहता है और क्या मामला आगे और गरमाता है।









