भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ विधायक प्रेम कुमार ने बिहार विधानसभा के नए स्पीकर के रूप में शपथ ली। शपथ ग्रहण के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव स्वयं उन्हें स्पीकर की कुर्सी तक लेकर गए और आसन पर बैठाया।
नामांकन में विपक्ष की अनुपस्थिति
स्पीकर पद के लिए एक दिन पहले, सोमवार 1 दिसंबर को, प्रेम कुमार ने अपना नामांकन दाखिल किया था। उल्लेखनीय है कि विपक्ष की ओर से किसी भी नेता ने नामांकन नहीं भरा, जिसके चलते उनका निर्वाचन पूरी तरह निर्विरोध हो गया। इसे सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर भाजपा की बढ़ती राजनीतिक मजबूती के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है।
बदली राजनीतिक तस्वीर में बीजेपी का प्रभाव
हालिया विधानसभा चुनाव में भाजपा 89 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी है, जबकि जेडीयू 85 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही। यह पहली बार है जब गठबंधन सरकार में भाजपा पूर्ण रूप से ‘बड़े भाई’ की स्थिति में नजर आ रही है। स्पीकर पद अब भाजपा के खाते में आने से यह स्थिति और अधिक पुख्ता हो गई है।
सरकार में भाजपा की बढ़ी पकड़
नीतीश कुमार भले ही मुख्यमंत्री पद पर कायम हैं, लेकिन सरकार के अहम पद भाजपा के नियंत्रण में हैं। दोनों उपमुख्यमंत्री—सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा—भाजपा से आते हैं। साथ ही गृह विभाग और अब विधानसभा अध्यक्ष का पद भी पार्टी के हाथ में है। इससे यह स्पष्ट हो गया है कि सरकार की नीति-निर्धारण से लेकर विधानसभा संचालन तक भाजपा का दखल पहले से अधिक प्रभावशाली होगा।

अनुभव और सादगी की पहचान हैं प्रेम कुमार
नौवीं बार विधायक चुने गए प्रेम कुमार बिहार की राजनीति में अपने शांत, सौम्य और अनुभवी नेतृत्व के लिए जाने जाते हैं। विपक्ष द्वारा चुनौती न देना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि उनके नाम पर व्यापक सहमति पहले से ही बन चुकी थी।
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भविष्य की राजनीति पर असर
स्पीकर पद भाजपा के पास जाने के बाद राज्य की सत्ता संरचना में पार्टी की निर्णायक भूमिका स्थापित हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस बदले समीकरण का असर सरकार के नीतिगत फैसलों और राजनीतिक गठजोड़ों पर साफ दिखाई देगा।









