केंद्रीय दूरसंचार विभाग (DoT) ने मोबाइल हैंडसेट निर्माताओं और आयातकों को निर्देश दिया है कि आगामी 90 दिनों के भीतर भारत में बनने या आयात होने वाले हर नए मोबाइल फोन में Sanchar Saathi App पहले से मौजूद होना चाहिए। 28 नवंबर को जारी निर्देश के मुताबिक यह कदम मोबाइल धोखाधड़ी रोकने और IMEI से जुड़े दुरुपयोग पर नजर रखने के उद्देश्य से उठाया गया है।
क्या है आदेश में?
सरकारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि तीन महीने की अवधि के भीतर सभी नई डिवाइसों में संचार साथी ऐप प्री-इंस्टॉल होना अनिवार्य होगा। वहीं, जो हैंडसेट पहले से उत्पादन या वितरण चरण में हैं, उन पर यह सुविधा सॉफ्टवेयर अपडेट के माध्यम से उपलब्ध करानी होगी। निर्माताओं को 120 दिनों के भीतर अनुपालन रिपोर्ट सरकार को सौंपनी होगी।
संचार साथी ऐप उपयोगकर्ताओं को मोबाइल की IMEI संख्या की सत्यता परखने, संदिग्ध गतिविधि की शिकायत करने और खोए या चोरी हुए फोन की रिपोर्ट करने की सुविधा देता है। दूरसंचार पहचान से छेड़छाड़ को 2023 के कानून में गंभीर अपराध माना गया है, जिसके लिए तीन साल तक की सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान है।
सरकार ने यह भी निर्देश दिया है कि ऐप डिवाइस के पहले उपयोग या सेटअप के दौरान उपभोक्ताओं को आसानी से दिखना चाहिए। यदि कंपनियां नियमों का पालन नहीं करतीं, तो उन पर दूरसंचार अधिनियम 2023 और साइबर सुरक्षा नियम 2024 के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

राजनीतिक हलचल तेज
सरकारी फैसले के बाद विपक्ष ने इसे निजता पर हमले के रूप में देखा है। कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने कहा कि किसी भी नागरिक के फोन में ऐसे ऐप का जबरन इंस्टॉल किया जाना “निजता के अधिकार” का उल्लंघन है। उनके अनुसार, अनइंस्टॉल न किया जा सकने वाला सरकारी ऐप नागरिकों की गतिविधियों पर निगरानी का जरिया बन सकता है।
शिवसेना (UBT) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह कदम “सर्विलांस को वैध बनाने” की दिशा में बढ़ता हुआ कदम है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिकायत निवारण प्रणाली को मजबूत करने के बजाय सरकार लोगों पर नजर रखने की कोशिश कर रही है।
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आगे क्या?
जहां केंद्र सरकार इसे सुरक्षित डिजिटल वातावरण की आवश्यकता बता रही है, वहीं विपक्ष इसे नागरिक स्वतंत्रता के लिए खतरा मान रहा है। ऐप अनिवार्य करने का यह फैसला आने वाले दिनों में तकनीकी, कानूनी और राजनीतिक बहस को और गहरा सकता है।








