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ऑनलाइन गेमिंग एक्ट को कोर्ट में मिली चुनौती, इस दिन होगी सुनवाई

ऑनलाइन गेमिंग एक्ट: भारत में सभी प्रकार के ऑनलाइन मनी गेम्स पर लगाए गए पूर्ण प्रतिबंध को चुनौती देने वाली याचिका पर कर्नाटक हाई कोर्ट 30 अगस्त को सुनवाई करेगा।

Gautam Rishi by Gautam Rishi
28 August 2025
in खेल
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ऑनलाइन गेमिंग एक्ट को कोर्ट में मिली चुनौती, इस दिन होगी सुनवाई - Panchayati Times

ऑनलाइन गेमिंग एक्ट

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ऑनलाइन गेमिंग एक्ट: भारत में सभी प्रकार के ऑनलाइन मनी गेम्स पर लगाए गए पूर्ण प्रतिबंध को चुनौती देने वाली याचिका पर कर्नाटक हाई कोर्ट 30 अगस्त को सुनवाई करेगा। यह याचिका देश की प्रमुख ऑनलाइन गेमिंग कंपनी A23 की ओर से दायर की गई है, जिसमें हाल ही में लागू “ऑनलाइन गेमिंग (संवर्धन और विनियमन) अधिनियम, 2025” को असंवैधानिक बताया गया है।

वरिष्ठ वकीलों ने की त्वरित सुनवाई की मांग

सोमवार को याचिका का त्वरित उल्लेख वरिष्ठ अधिवक्ताओं सी. आर्यमा सुंदरम और ध्यन चिन्नप्पा ने किया। उन्होंने अदालत से अपील की कि इस मामले को तत्काल सुनवाई योग्य माना जाए, क्योंकि कानून के प्रभाव से हजारों लोगों की आजीविका और उद्योग का भविष्य दांव पर है।

कानून की मुख्य विशेषताएं

हाल ही में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा हस्ताक्षरित यह अधिनियम अब कानून बन चुका है। यह कानून:

  • सभी प्रकार के ऑनलाइन मनी गेम्स (चाहे वे कौशल पर आधारित हों या संयोग पर) को प्रतिबंधित करता है।
  • इन गतिविधियों को गंभीर अपराध (cognisable और non-bailable) की श्रेणी में रखा गया है, जिससे पुलिस को बिना वारंट गिरफ्तारी और तलाशी का अधिकार मिल गया है।
  • तीन साल तक की सजा और ₹1 करोड़ तक जुर्माने का प्रावधान किया गया है; दोहराव की स्थिति में यह सजा और जुर्माना दोगुना हो सकता है।
  • बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं को ऐसे लेन-देन रोकने का निर्देश दिया गया है।
  • राष्ट्रीय नियामक प्राधिकरण का गठन किया जाएगा, जो गेम्स को पंजीकृत करेगा, वर्गीकृत करेगा और नियमों की निगरानी करेगा।
  • ई-स्पोर्ट्स और शैक्षिक/सामाजिक गेम्स को बढ़ावा देने की बात भी कही गई है, बशर्ते वे बिना पैसे के खेले जा रहे हों।
ऑनलाइन गेमिंग एक्ट को कोर्ट में मिली चुनौती, इस दिन होगी सुनवाई - Panchayati Times
ऑनलाइन गेमिंग एक्ट

सरकार की दलीलें

सरकार का कहना है कि यह कदम जन स्वास्थ्य, आर्थिक सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में उठाया गया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि:

  • कई गेम्स में आकर्षक लेकिन लत पैदा करने वाले डिज़ाइन का इस्तेमाल होता है;
  • युवाओं और गरीब तबकों में आर्थिक बर्बादी और मानसिक तनाव की घटनाएं बढ़ी हैं;
  • धोखाधड़ी, टैक्स चोरी और आतंकवाद फंडिंग जैसे मामलों से इन प्लेटफॉर्म्स के संबंध सामने आए हैं;
  • राज्य स्तर पर नियंत्रण की कोशिशें विदेशी ऑपरेटरों के कारण विफल होती रही हैं।

संवैधानिक और कानूनी सवाल

वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मल्होत्रा के अनुसार, यह कानून भारतीय न्यायशास्त्र की उस परंपरा के खिलाफ है, जिसमें “कौशल आधारित गेम्स” को हमेशा कानूनी संरक्षण मिलता रहा है। उनका कहना है कि यह कानून अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का उल्लंघन करता है क्योंकि यह रचनात्मक और रणनीतिक कौशल वाले खेलों को भी जुए के समकक्ष मानता है।

मल्होत्रा ने यह भी कहा कि सरकार ने हाल तक स्किल गेम्स को वैध मानते हुए उन पर कम दर से GST लगाया था, लेकिन अब सीधे आपराधिक करार देना नीति में अचानक और कठोर बदलाव है।

याचिका की तैयारी

यह याचिका कीस्टोन पार्टनर्स के अधिवक्ता प्रदीप नायक और संकीर्त विट्टल द्वारा दायर की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि यह कानून ऑनलाइन गेमिंग उद्योग को बंद करने जैसा है, जबकि इससे लाखों लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं।

यह भी पढ़ें: शहडोल की ग्राम पंचायत में दो फोटोकॉपी के बने 4 हजार रुपये के बिल 

अब सभी की निगाहें 30 अगस्त की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि क्या अदालत इस कानून को स्थगित करती है या सरकार की नीति को संवैधानिक वैधता देती है। यह मामला न केवल उद्योग, बल्कि भारत में डिजिटल स्वतंत्रता और उपभोक्ता अधिकारों की दिशा भी तय कर सकता है।

Tags: A23ऑनलाइन गेमिंग एक्टकर्नाटक हाई कोर्ट
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