पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए बताया कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर तत्काल प्रभाव से युद्धविराम पर सहमति जताई है। यह कदम ऐसे समय में आया है जब क्षेत्र में बढ़ते तनाव ने वैश्विक चिंता को बढ़ा दिया था। शरीफ ने इस निर्णय को दूरदर्शी बताते हुए दोनों देशों के नेतृत्व का आभार व्यक्त किया।
उन्होंने आगे कहा कि 10 अप्रैल 2026 को इस्लामाबाद में दोनों पक्षों के प्रतिनिधिमंडलों को आमंत्रित किया गया है, जहां लंबित मुद्दों पर निर्णायक बातचीत की जाएगी। इस प्रस्तावित ‘इस्लामाबाद वार्ता’ को स्थायी शांति की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
ईरान ने पाकिस्तान के प्रयासों को सराहा
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने पाकिस्तान की भूमिका की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री शरीफ और पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में तनाव कम करने और संवाद को बढ़ावा देने में पाकिस्तान के प्रयास सराहनीय हैं।
अराघची ने स्पष्ट किया कि यदि ईरान के खिलाफ सैन्य हमले रोके जाते हैं, तो ईरान भी अपनी रक्षात्मक कार्रवाई रोक देगा। साथ ही, दो सप्ताह के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ के जरिए सुरक्षित समुद्री आवागमन सुनिश्चित किया जाएगा, जो वैश्विक व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग है।
अमेरिका ने इसे अपनी रणनीतिक सफलता बताया
वहीं, व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने इस युद्धविराम को अमेरिका की बड़ी जीत करार दिया। उन्होंने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में शुरू किया गया सैन्य अभियान ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ अपने निर्धारित लक्ष्यों से आगे बढ़ते हुए सफल रहा।
लेविट के अनुसार, केवल 38 दिनों में अमेरिकी सेना ने अपने प्रमुख सैन्य उद्देश्यों को हासिल कर लिया, जिससे कूटनीतिक दबाव बना और वार्ता का रास्ता खुला। उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ को फिर से खोलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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आगे की राह: कूटनीति या अस्थायी राहत?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह युद्धविराम क्षेत्र में अस्थायी राहत जरूर ला सकता है, लेकिन स्थायी शांति के लिए इस्लामाबाद में होने वाली वार्ता निर्णायक साबित होगी। सभी की नजरें अब इस बैठक पर टिकी हैं, जहां वर्षों पुराने विवादों को सुलझाने की कोशिश की जाएगी।








