पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल अब 20वें दिन में पहुंच गई है। उनकी बिगड़ती सेहत के बीच विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं का समर्थन लगातार बढ़ता जा रहा है। शुक्रवार को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचे और वांगचुक से मुलाकात कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। इससे पहले कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से वांगचुक के मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी थी।
वांगचुक कथित परीक्षा अनियमितताओं और शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। उनके प्रमुख मांगों में केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग भी शामिल है।
पवन खेड़ा ने सरकार पर साधा निशाना
जंतर-मंतर पर मुलाकात के बाद पवन खेड़ा ने कहा कि सोनम वांगचुक की सेहत को लेकर सभी चिंतित हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार लोकतांत्रिक विरोध की भावना को गंभीरता से नहीं ले रही है।
खेड़ा ने यह भी कहा कि किसी भी आंदोलन में लोगों की जान जोखिम में पड़ना उचित नहीं है और लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवाद के जरिए समाधान निकलना चाहिए।
कांग्रेस ने भी उठाई जवाबदेही की मांग
पवन खेड़ा के जंतर-मंतर पहुंचने से पहले कांग्रेस ने भी इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा। पार्टी का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित किए बिना परीक्षा प्रणाली में सुधार संभव नहीं है।
कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा करते हुए शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता पर जोर दिया।
कई विपक्षी नेताओं का मिल चुका है समर्थन
सोनम वांगचुक के आंदोलन को पिछले कुछ दिनों में कई राजनीतिक दलों का समर्थन मिला है।
इससे पहले—
- आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल जंतर-मंतर पहुंचकर उनसे मुलाकात कर चुके हैं।
- समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव और अन्य नेताओं ने भी समर्थन जताया।
- शिवसेना की नेता सुषमा अंधारे ने भी आंदोलन स्थल पर पहुंचकर वांगचुक से मुलाकात की।
इन मुलाकातों के बाद यह आंदोलन राजनीतिक और सार्वजनिक स्तर पर अधिक चर्चा का विषय बन गया है।
राज ठाकरे ने भी जताया समर्थन
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने भी सोनम वांगचुक की मांगों का समर्थन किया है।
उन्होंने कहा कि देश में सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए और सरकार को इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
स्वास्थ्य को लेकर बढ़ी चिंता
लगातार 20 दिनों से जारी भूख हड़ताल के कारण सोनम वांगचुक की सेहत को लेकर चिंता बढ़ गई है। उनके स्वास्थ्य की स्थिति को देखते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में भी एक याचिका दायर की गई थी।
सुनवाई के दौरान अदालत ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि वांगचुक के स्वास्थ्य की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए और आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
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आंदोलन पर टिकी देशभर की नजर
सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल अब केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं रह गई है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा पारदर्शिता और सरकारी जवाबदेही पर राष्ट्रीय बहस का विषय बन चुकी है। राजनीतिक दलों के बढ़ते समर्थन और अदालत की निगरानी के बीच अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार इस आंदोलन पर आगे क्या रुख अपनाती है।








