लोकसभा में मंगलवार को प्रधानमंत्री मोदी ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर हुई चर्चा पर अपना जवाब देते हुए स्पष्ट किया कि यह “भारत के विजयोत्सव” का समय है। उन्होंने कहा कि यह अभियान न केवल एक सैन्य सफलता है, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की राजनीतिक और सामरिक इच्छाशक्ति का प्रतीक भी है। पीएम मोदी ने अपने संबोधन में आतंकवाद, पाकिस्तान की धमकियों और भारत की निर्णायक प्रतिक्रिया पर विस्तार से बात की।
यह भारत के गौरवगान और विजयोत्सव का सत्र है
पीएम मोदी ने कहा कि संसद का यह सत्र भारत की वीरता और संकल्प का उत्सव है। “मैं आज इस सदन में भारत का पक्ष रखने आया हूं। जिनकी नज़र में भारत का पक्ष दिखाई नहीं देता, उन्हें आईना दिखाने भी आया हूं,” उन्होंने दो टूक कहा। प्रधानमंत्री ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने आतंक के मंसूबों को कुचलने का काम किया और देश की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई।
22 अप्रैल का बदला 22 मिनट में लिया
प्रधानमंत्री ने बताया कि 22 अप्रैल को जब पहलगाम में निर्दोष श्रद्धालुओं पर हमला हुआ, वे उस समय विदेश यात्रा पर थे। “जैसे ही भारत लौटा, तत्काल उच्चस्तरीय बैठक बुलाई और सेना को पूरी छूट दी गई। आतंकियों और उनके आकाओं को ऐसा जवाब देने का संकल्प लिया गया, जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की होगी,” उन्होंने कहा।
पीएम मोदी ने बताया कि 6 और 7 मई की रात भारतीय सेना ने आतंकियों के ठिकानों पर जबरदस्त कार्रवाई की। “हमने वहां भी घुसकर मारा, जहां पहले कभी नहीं गए थे। आतंकियों के अड्डों को धुआं-धुआं कर दिया। और ये सब 22 मिनट में कर दिखाया गया,” उन्होंने गर्व के साथ कहा।
पाकिस्तान की न्यूक्लियर धमकियों को झूठा साबित कर दिया
प्रधानमंत्री ने कहा कि जब भारत की तरफ से जवाबी कार्रवाई के संकेत मिलने लगे, तब पाकिस्तान ने परमाणु हमले की धमकी देना शुरू कर दिया। “हम झुके नहीं, हमने साबित कर दिया कि ये धमकियां अब नहीं चलेंगी। भारत ने पाकिस्तान को ऐसा दर्द दिया है कि उसके कई एयरबेस आज भी आईसीयू में हैं,” उन्होंने कहा।
दंगे भड़काने की आतंकी साजिश थी पहलगाम हमला
पीएम मोदी ने पहलगाम हमले को “जघन्य और सुनियोजित साजिश” करार देते हुए कहा कि यह हमला देश में सांप्रदायिक तनाव फैलाने की कोशिश थी। “लोगों को धर्म पूछकर मारा गया, लेकिन देश ने एकता के साथ इसका जवाब दिया और साजिश को नाकाम कर दिया,” उन्होंने कहा।

सेना को था विश्वास, सरकार ने दी खुली छूट
प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें अपनी सेना की ताकत पर पूरा भरोसा था, इसलिए उन्होंने सेना को कार्रवाई के लिए पूरी आज़ादी दी। “हमने यह सिद्ध कर दिया है कि भारत अब चुप बैठने वाला देश नहीं है। जिसने देश पर हमला किया, उसे घर में घुसकर जवाब मिलेगा,” उन्होंने स्पष्ट किया।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह भाषण न केवल देश की सैन्य नीति का एक स्पष्ट संकेत है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि भारत अब आतंकवाद के खिलाफ किसी भी हद तक जाने को तैयार है। संसद में उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस और तेज हो सकती है, लेकिन एक बात साफ है—सरकार इसे भारत की निर्णायक जीत के रूप में प्रस्तुत कर रही है।









