विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने संसद में अपने संबोधन के दौरान पहलगाम हमले को “क्रूर और निंदनीय” बताते हुए सरकार की नीति और प्रतिक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने इस दुखद हमले के बाद एकजुट होकर सरकार के साथ खड़े होने में कोई कोताही नहीं बरती, लेकिन अब सवाल उठाने का समय है क्योंकि सरकार की रणनीति में इच्छाशक्ति की कमी दिखाई देती है।
हम चट्टान की तरह सरकार के साथ खड़े रहे
राहुल गांधी ने कहा कि उन्होंने हमले के बाद जम्मू-कश्मीर और उत्तर प्रदेश में शहीदों के परिजनों से मुलाकात की। “हमने नरवाल साहब के घर जाकर शहीद बेटे के परिवार को ढांढस बंधाया, जो नेवी में तैनात था। कश्मीर में भी पीड़ित परिवारों से मिलने का मौका मिला,” उन्होंने कहा।
सेना को आज़ादी, राजनीतिक इच्छाशक्ति जरूरी
उन्होंने कहा कि जब किसी सैनिक से हाथ मिलाओ तो समझ में आता है कि वह टाइगर है। “टाइगर को आज़ादी चाहिए। सेना के पराक्रम को तभी बल मिलता है जब राजनीतिक नेतृत्व उसमें विश्वास दिखाता है। 1971 में इंदिरा गांधी ने अमेरिकी दबाव की परवाह किए बिना सेना को पूर्ण स्वतंत्रता दी और एक ऐतिहासिक जीत दर्ज की।”
राहुल गांधी ने इस संदर्भ में जनरल सैम मानेकशॉ का भी ज़िक्र किया। उन्होंने कहा कि जब मानेकशॉ ने छह महीने का समय मांगा था, इंदिरा गांधी ने राजनीतिक दूरदर्शिता दिखाते हुए पूरा समय दिया था, जिसके फलस्वरूप युद्ध में विजय मिली।
सरकार ने लड़ने से पहले ही झुकने का संदेश दिया
राहुल गांधी ने सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि रक्षा मंत्री ने बताया कि भारत ने पाकिस्तान को 1:35 बजे सूचित कर दिया कि हमला किया गया है, लेकिन यह ‘एस्केलेटरी’ नहीं है। “आपने तो 30 मिनट में ही पाकिस्तान के सामने आत्मसमर्पण जैसा संदेश दे दिया। आप लड़ना ही नहीं चाहते थे। आपने हमारे पायलट्स के हाथ-पांव बांध दिए,” उन्होंने तीखे स्वर में कहा।
गलती सेना की नहीं, सरकार की है
उन्होंने दो टूक कहा कि इस पूरे मामले में कोई चूक हुई है तो वह सेना की नहीं, सरकार की है। “सरकार ने आधे मन से जवाब दिया। अगर किसी को थप्पड़ मारो और तुरंत कहो कि दूसरा नहीं मारेंगे, तो यह कमजोरी का प्रतीक है,” उन्होंने कहा।

राहुल गांधी ने अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे का भी ज़िक्र किया जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध टलवाया। राहुल ने चुनौती दी कि अगर प्रधानमंत्री में हिम्मत है तो वह संसद में खड़े होकर कहें कि ट्रंप झूठ बोल रहे हैं। “अगर उनमें इंदिरा गांधी के 50% भी साहस है, तो वह ये कह पाएंगे,” उन्होंने कहा।
न्यू नॉर्मल के नाम पर चुप्पी
विदेश मंत्री के भाषण पर कटाक्ष करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि “अब नया चलन है – ‘न्यू नॉर्मल’। भाषण में बताया गया कि सभी इस्लामिक देशों ने आतंकवाद की निंदा की, लेकिन यह नहीं बताया कि पाकिस्तान की निंदा किसी ने की या नहीं। पहलगाम हमले के बाद एक भी देश ने सीधे पाकिस्तान को ज़िम्मेदार नहीं ठहराया।”
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राहुल गांधी के इस भाषण ने न सिर्फ सरकार की कूटनीतिक रणनीति पर सवाल उठाए, बल्कि यह भी दर्शाया कि विपक्ष अब सिर्फ एकजुटता दिखाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जवाबदेही की भी माँग करेगा। संसद में उनके तीखे तेवरों ने बहस को एक नई दिशा दे दी है।









