कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद राहुल गांधी को बुधवार, 6 अगस्त को चाईबासा की MP-MLA कोर्ट से राहत मिली। उन्हें एक पुराने मानहानि के मामले में सशर्त जमानत दे दी गई है। यह मामला वर्ष 2018 का है, जब राहुल गांधी ने एक राजनीतिक अधिवेशन के दौरान भाजपा नेता और मौजूदा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लेकर विवादास्पद टिप्पणी की थी। इस बयान के बाद भाजपा नेता प्रताप कटिहार ने उनके खिलाफ मानहानि का केस दर्ज करवाया था।
कोर्ट में पेश हुए राहुल गांधी
राहुल गांधी बुधवार सुबह लगभग 10:55 बजे कोर्ट पहुंचे। उनके वकीलों ने अदालत में पेश होकर जमानत की अर्जी लगाई, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। राहुल गांधी की ओर से अदालत में वरिष्ठ अधिवक्ता प्रदीप चंद्रा और दीपांकर रॉय ने पक्ष रखा। कोर्ट ने उन्हें सशर्त जमानत देते हुए ट्रायल की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का निर्देश दिया।
क्या है मामला?
28 मार्च 2018 को कांग्रेस के एक अधिवेशन के दौरान राहुल गांधी ने अमित शाह को लेकर एक बयान दिया था, जिसे भाजपा ने आपत्तिजनक बताया। इसके बाद भाजपा नेता प्रताप कटिहार ने 9 जुलाई 2018 को चाईबासा में उनके खिलाफ मानहानि का मामला दर्ज कराया था।
मामले में कई बार राहुल को समन जारी किया गया, लेकिन वे अदालत में उपस्थित नहीं हुए। पहले यह केस चाईबासा सीजेएम कोर्ट से रांची स्थित MP-MLA स्पेशल कोर्ट में स्थानांतरित किया गया था, लेकिन बाद में फिर से चाईबासा MP-MLA कोर्ट में वापस लाया गया।
गैर-जमानती वारंट तक पहुंचा मामला
कोर्ट ने 2022 में पहले जमानती वारंट और फिर फरवरी 2024 में गैर-जमानती वारंट जारी किया था। राहुल गांधी ने सीआरपीसी की धारा 205 के तहत व्यक्तिगत पेशी से छूट की मांग की थी, जिसे निचली अदालत ने खारिज कर दिया। उन्होंने इसके खिलाफ झारखंड हाईकोर्ट का रुख किया और कुछ समय के लिए राहत मिली, लेकिन मार्च 2024 में हाईकोर्ट ने याचिका निस्तारित कर दी।
इसके बाद चाईबासा कोर्ट ने 22 मई 2025 को पुनः गैर-जमानती वारंट जारी किया। आखिरकार राहुल गांधी ने 6 अगस्त को कोर्ट में हाजिरी दी और उन्हें जमानत दे दी गई।
आगे क्या?
अब यह मामला ट्रायल के चरण में प्रवेश कर चुका है। कोर्ट में अगली सुनवाई की तारीख जल्द निर्धारित की जाएगी। राहुल गांधी को हर सुनवाई में उपस्थित रहने या कोर्ट द्वारा निर्धारित शर्तों का पालन करना होगा।
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इस केस का राजनीतिक असर भी देखने को मिल सकता है, क्योंकि मामला भाजपा और कांग्रेस के बीच लंबे समय से जारी सियासी बयानबाज़ी का हिस्सा बन चुका है। अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि ट्रायल के दौरान और क्या-क्या मोड़ आते हैं।









