केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक नया कीर्तिमान स्थापित कर लिया है। वे देश के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले गृहमंत्री बन गए हैं। 5 अगस्त 2025 को एनडीए की संसदीय दल की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस उपलब्धि पर अमित शाह की खुलकर सराहना की। बैठक के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि “शाह का योगदान अभूतपूर्व रहा है और उन्होंने देश की सुरक्षा तथा नीति निर्माण में निर्णायक भूमिका निभाई है।”
अमित शाह ने इस मुकाम पर पहुंचते हुए 2,258 दिन गृहमंत्री पद पर सेवा दी है, जिससे उन्होंने पूर्व गृह मंत्री लाल कृष्ण आडवाणी के 2,256 दिनों के कार्यकाल को पीछे छोड़ दिया। इससे पहले सरदार वल्लभभाई पटेल ने यह पद 1,218 दिन संभाला था।
अहम फैसलों से जुड़ा रहा शाह का कार्यकाल
अमित शाह का कार्यकाल कई ऐतिहासिक और साहसिक निर्णयों से जुड़ा रहा है। उनके नेतृत्व में अनुच्छेद 370 को हटाया गया, जिससे जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा समाप्त हुआ और क्षेत्र को पूरी तरह भारत के कानूनों के अंतर्गत लाया गया। इसके अलावा नागरिकता संशोधन कानून (CAA) पारित कर देश की नागरिकता नीति में बड़ा बदलाव किया गया।
गृहमंत्री ने तीन तलाक को अपराध घोषित कर मुस्लिम महिलाओं को न्याय दिलाने का ऐतिहासिक कदम भी उठाया। साथ ही, यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को लागू करने की दिशा में पहल की, जो एक समान नागरिक संहिता की ओर देश को ले जाने वाला कदम माना जा रहा है।
ऑपरेशन सिंदूर पर संसद में गरमा गरम बहस
संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से ही ऑपरेशन सिंदूर को लेकर विपक्ष और सत्तापक्ष आमने-सामने रहे। यह ऑपरेशन जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में चलाया गया था, जिसमें 100 से ज्यादा आतंकवादियों को मार गिराया गया था। विपक्ष ने इस पर संसद में विस्तृत चर्चा की मांग की।

सरकार की ओर से गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस जयशंकर और खुद प्रधानमंत्री मोदी ने जवाब दिया और ऑपरेशन की आवश्यकता, रणनीति और सफलताओं को सदन के सामने रखा।
पीएम मोदी के दूसरे कार्यकाल से जुड़ी उपलब्धियां
गौरतलब है कि अमित शाह ने 30 मई 2019 को गृहमंत्री का पद संभाला था। तब से लेकर अब तक उन्होंने आतंकवाद, आंतरिक सुरक्षा, ड्रग्स माफिया, और साइबर क्राइम जैसे मुद्दों पर कठोर कार्रवाई करते हुए देश की आंतरिक संरचना को मजबूत किया है।
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अमित शाह का यह रिकॉर्ड सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि उनके कार्यकाल की राजनीतिक दृढ़ता, रणनीतिक सोच और निर्णयात्मक क्षमता का प्रतीक है। प्रधानमंत्री मोदी की सरकार में उन्हें जो जिम्मेदारी दी गई थी, उसे उन्होंने पूरी निष्ठा और प्रभावशीलता के साथ निभाया है। विपक्ष के विरोधों के बावजूद शाह ने न केवल अपने निर्णयों को मजबूती से आगे बढ़ाया, बल्कि उन्हें लागू कराकर राजनीति में एक मिसाल कायम की है।









