राष्ट्रीय राजधानी में छात्रों से जुड़े मुद्दों और नीट परीक्षा विवाद को लेकर कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन मंगलवार को और तेज हो गया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास से शुरू हुआ मार्च प्रधानमंत्री आवास के निकट धरने में बदल गया, जहां राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और पार्टी के कई सांसद प्रदर्शन पर बैठ गए।
धरने के दौरान कांग्रेस ने केंद्र सरकार के सामने कई अहम मांगें रखीं और छात्रों से जुड़े मामलों में जवाबदेही तय करने की मांग दोहराई।
सरकार की ओर से बातचीत की पहल
धरना शुरू होने के कुछ समय बाद केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह और गृह सचिव गोविंद मोहन प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे। दोनों ने राहुल गांधी से मुलाकात कर स्थिति पर चर्चा की। करीब आधे घंटे तक चली बातचीत के बाद सरकारी प्रतिनिधि वापस लौट गए। हालांकि, इस बैठक के बाद भी धरना जारी रहा।
राहुल गांधी ने छात्रों के समर्थन में की अपील
धरने के बीच राहुल गांधी ने सोशल मीडिया के माध्यम से केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि छात्रों पर किसी भी प्रकार की कार्रवाई पूरे देश के भविष्य पर हमला है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि जो लोग छात्रों को न्याय दिलाने के पक्ष में हैं, वे इस आंदोलन का समर्थन करें।
राहुल गांधी ने यह भी कहा कि छात्रों की आवाज़ को दबाया नहीं जा सकता और सरकार को उनकी मांगों पर जवाब देना होगा।
कांग्रेस की सरकार से छह प्रमुख मांगें
धरने के दौरान कांग्रेस ने केंद्र सरकार के सामने निम्नलिखित मांगें रखीं—
- केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा।
- संसद में नीट परीक्षा विवाद पर विस्तृत चर्चा।
- छात्रों पर हुए लाठीचार्ज को लेकर गृह मंत्री का संसद में बयान।
- लाठीचार्ज की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच।
- घायल छात्रों को बेहतर चिकित्सा सुविधा।
- प्रभावित छात्रों को उचित मुआवजा।
कांग्रेस का कहना है कि इन मांगों पर कार्रवाई होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
आम आदमी पार्टी की प्रतिक्रिया
धरने को लेकर आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस का यह प्रदर्शन छात्रों के मूल आंदोलन का ध्यान भटकाने की कोशिश है। उनके अनुसार, छात्रों के मुद्दे पर चल रहे आंदोलन को कमजोर करने के लिए यह कदम उठाया गया है।
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राजनीतिक माहौल हुआ गर्म
छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर विपक्ष और केंद्र सरकार के बीच टकराव लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। एक ओर कांग्रेस सरकार से जवाबदेही की मांग कर रही है, वहीं दूसरी ओर अन्य विपक्षी दल भी अपने-अपने तरीके से इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं। आने वाले दिनों में संसद और सड़कों दोनों पर इस विषय को लेकर राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।









