संसद के सत्र के दौरान सोमवार को सुप्रिया सुले ने कई अहम मुद्दों पर अपनी बात रखते हुए विपक्ष के नेता राहुल गांधी का खुलकर समर्थन किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी किसी भी जांच एजेंसी से डरने वाले नहीं हैं और ईमानदारी के मामले में उनका रिकॉर्ड बेदाग है।
सुले ने अपने संबोधन में कहा कि यदि ईमानदारी के लिए ओलंपिक में कोई पदक होता, तो राहुल गांधी जरूर उसे जीतते। उनके इस बयान को सदन में राजनीतिक बहस के बीच अहम माना जा रहा है।
महिला आरक्षण पर उठाए सवाल
महिला आरक्षण के मुद्दे पर भी सुप्रिया सुले ने सरकार के रुख पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि हाल ही में जिस विधेयक की चर्चा हो रही है, वह वास्तविक महिला आरक्षण से अधिक परिसीमन प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है। उनका दावा था कि महिला आरक्षण से संबंधित प्रावधान पहले ही पारित हो चुके हैं और अधिसूचित भी किए जा चुके हैं।
देवेंद्र फडणवीस पर निशाना
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि अगर जनगणना के कारण महिला आरक्षण लागू होने में देरी हो रही है, तो यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि प्रक्रिया को समय पर पूरा क्यों नहीं किया गया। उनके अनुसार, सरकार चाहती तो इसे तय समयसीमा में लागू कर सकती थी।
आदिवासी लड़कियों के लापता होने पर चिंता
सुले ने राज्य में आदिवासी समुदाय की लड़कियों के लापता होने की घटनाओं पर भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने इस मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की है। साथ ही उन्होंने कहा कि सत्ताधारी दलों द्वारा लगाए जा रहे आरोप निराधार हैं और लोकतंत्र में विरोध का अधिकार सभी को है।
प्रशासनिक अधिकारियों के व्यवहार पर भी सवाल
इसके अलावा उन्होंने गोरेगांव के मोतीलाल नगर से जुड़े एक कथित वीडियो का जिक्र करते हुए कहा कि एक आईएएस अधिकारी द्वारा स्थानीय निवासियों के साथ किए गए दुर्व्यवहार की जांच होनी चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की।
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संसद में दिए गए इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और गर्म होने के आसार हैं, क्योंकि इसमें केंद्र और राज्य सरकार दोनों पर सवाल उठाए गए हैं।









