देशभर में आम जनता को राहत देने वाला बड़ा फैसला अब 22 सितंबर से लागू होने जा रहा है। जीएसटी काउंसिल द्वारा की गई दरों में कटौती का असर अब लोगों की जेब पर साफ दिखेगा। शैंपू, साबुन से लेकर कार-बाइक तक और यहां तक कि ट्रेन यात्रियों के लिए पीने का पानी भी सस्ता हो जाएगा। रेलवे ने यात्रियों को राहत देते हुए ‘रेल नीर’ पानी की बोतलों के दाम कम करने का ऐलान कर दिया है।
रेलवे की ओर से जारी एक सर्कुलर के मुताबिक, अब 1 लीटर रेल नीर की बोतल ₹14 में और आधा लीटर की बोतल ₹9 में उपलब्ध होगी। पहले इनकी कीमत क्रमशः ₹15 और ₹10 थी। यह नई दरें 22 सितंबर से लागू होंगी।
रेलवे मंत्रालय ने कहा है कि यह फैसला जीएसटी में की गई कटौती का सीधा लाभ यात्रियों तक पहुंचाने के उद्देश्य से लिया गया है। मंत्रालय ने सोशल मीडिया के जरिए यह जानकारी साझा करते हुए बताया कि कई यात्रियों की यह शिकायत रही है कि कुछ वेंडर 15 रुपये की बोतल के लिए 20 रुपये तक वसूलते हैं। अब नए एमआरपी लागू होने से ऐसे मामलों पर भी लगाम लगने की उम्मीद है।
GST स्लैब में बड़ा बदलाव
गौरतलब है कि 3 सितंबर को जीएसटी काउंसिल ने एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए मौजूदा चार स्लैब (5%, 12%, 18%, और 28%) में से 12% और 28% स्लैब को खत्म कर दिया। 22 सितंबर से केवल दो स्लैब—5% और 18%—प्रभावी रहेंगे। सरकार का उद्देश्य है कि टैक्स संरचना को सरल बनाया जाए और इसका लाभ सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचे।
कंपनियों ने भी घटाए दाम
GST दरों में कटौती के बाद कई FMCG और ऑटोमोबाइल कंपनियों ने पहले ही अपने उत्पादों के दाम घटाने की घोषणा कर दी है। शैंपू, साबुन, डिटर्जेंट, टूथपेस्ट जैसे रोजाना इस्तेमाल में आने वाले सामान अब सस्ते दामों में उपलब्ध होंगे। इसके अलावा, कुछ दोपहिया और चारपहिया वाहन निर्माता कंपनियों ने भी कीमतें घटाने का एलान कर दिया है।
सरकार की सख्ती
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साफ कहा है कि जीएसटी में की गई कटौती का लाभ आम जनता तक हर हाल में पहुंचाया जाएगा। अगर कोई भी कंपनी या विक्रेता इस कटौती का फायदा ग्राहकों तक नहीं पहुंचाता है तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
22 सितंबर से लागू होने जा रही यह नई कर व्यवस्था न सिर्फ रोजमर्रा की वस्तुओं को सस्ता बनाएगी, बल्कि रेलवे जैसे सार्वजनिक क्षेत्रों में भी लोगों को राहत देगी। रेल यात्रियों के लिए सस्ते दर पर शुद्ध पेयजल की सुविधा एक सराहनीय कदम है, जिससे यात्रा अनुभव और बेहतर होगा।
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अब देखना यह है कि कंपनियां और वेंडर सरकार के इस फैसले को कितनी ईमानदारी से लागू करते हैं, और आम लोगों को इसका कितना लाभ मिलता है।







