अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे और दान राशि में कथित गड़बड़ी के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट के आधार पर एफआईआर दर्ज होने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। सूत्रों के अनुसार, मामले को लेकर बढ़ते विवाद और नैतिक जिम्मेदारी के मद्देनजर दोनों ने यह निर्णय लिया।
8 आरोपी अदालत में किए जाएंगे पेश
एसआईटी की जांच के बाद पुलिस ने इस मामले में आठ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया है। मुहर्रम के अवकाश के कारण आरोपियों को नियमित अदालत के बजाय ड्यूटी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जाएगा, जहां रिमांड और अन्य कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सख्त संदेश
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जैसे ही अनियमितताओं की जानकारी मिली, तत्काल एसआईटी गठित कर जांच के निर्देश दिए गए। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद बिना देरी के एफआईआर दर्ज की गई। उन्होंने स्पष्ट कहा कि श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े मामलों में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और कानून अपना काम करेगा।
कैसे सामने आया मामला?
बताया जा रहा है कि मई के अंतिम सप्ताह में ट्रस्ट द्वारा बैंक में जमा हो रही दान राशि का मिलान करने के दौरान अधिकारियों को कुछ वित्तीय विसंगतियां दिखाई दीं। दान पेटियों से निकलने वाली नकदी की मात्रा में लगातार अंतर मिलने पर संदेह गहरा गया।
इसके बाद नोटों की गिनती वाले कक्ष में गुप्त कैमरे लगाए गए। जांच के दौरान सामने आई फुटेज में कुछ कर्मचारियों पर नोटों की गड्डियों से नकदी निकालकर अपने कपड़ों में छिपाने के आरोप लगे। इसी आधार पर आगे की कार्रवाई शुरू की गई।
जांच में सामने आया कथित तरीका
प्रारंभिक जांच के अनुसार, कुछ कर्मचारियों पर नोटों की गड्डियों की गिनती के दौरान हेरफेर करने का आरोप है। दावा है कि बैंक में जमा होने से पहले गड्डियों में फेरबदल कर राशि कम की जाती थी, जबकि रिकॉर्ड में पूरा भुगतान दर्शाया जाता था। इसी प्रक्रिया के जरिए लंबे समय तक कथित रूप से धन का गबन किया गया।
जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि इस प्रक्रिया में किन-किन लोगों की भूमिका थी और क्या इसमें संगठित तरीके से कई कर्मचारी शामिल थे।
कर्मचारियों की नियुक्ति पर भी उठे सवाल
जांच में यह पहलू भी सामने आया है कि नोटों की गिनती से जुड़े कई कर्मचारी परिचितों या सिफारिश के आधार पर नियुक्त किए गए थे। सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी में कथित लापरवाही के कारण कर्मचारियों की नियमित तलाशी नहीं होती थी, जिससे चोरी की घटनाओं को अंजाम देना आसान हो गया।
नकदी के साथ आभूषणों की भी जांच
एसआईटी यह भी जांच कर रही है कि क्या दान पेटियों में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए सोने-चांदी के आभूषणों में भी अनियमितता हुई। पुलिस ने कुछ संदिग्धों के पास से नकदी बरामद करने का दावा किया है, जबकि बैंक खातों और अन्य वित्तीय लेनदेन की भी जांच की जा रही है।
यह भी पढ़ें: Dhamaal 4 Trailer Out: अजय देवगन की धमाकेदार वापसी, इस दिन रिलीज होगी ‘धमाल 4’
आगे क्या होगा?
अब मामले की कानूनी प्रक्रिया तेज हो गई है। गिरफ्तार आरोपियों को अदालत में पेश किया जाएगा, जहां पुलिस रिमांड की मांग कर सकती है। वहीं एसआईटी की आगे की जांच में यह स्पष्ट होगा कि कथित घोटाले का दायरा कितना बड़ा था और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।









